अगले 54 वर्षों तक 15 जनवरी को ही मनेगी मकर संक्रांति, जानिए इसके पीछे का खगोलीय विज्ञान
Makar Sankranti 2026: ग्रहों के राजा सूर्य 14 जनवरी की रात्रि 9:39 बजे धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को ही ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 13 Jan 2026 04:48:29 PM (IST)Updated Date: Tue, 13 Jan 2026 04:50:46 PM (IST)
अगले 54 वर्षों तक 15 जनवरी को ही मनेगी मकर संक्रांतिHighLights
- 2080 तक 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति
- इसके बाद संक्रांति की तिथि 16 जनवरी हो जाएगी
- इस वर्ष का योग और धार्मिक महत्व
डिजिटल डेस्क। ग्रहों के राजा सूर्य 14 जनवरी की रात्रि 9:39 बजे धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को ही मकर संक्रांति कहा जाता है। इस वर्ष संक्रांति का पुण्यकाल लगभग 16 घंटे तक रहेगा, जो अगले दिन सूर्योदय के बाद 15 जनवरी की दोपहर तक माना जाएगा।
क्यों बदलती है मकर संक्रांति की तिथि?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य के राशि परिवर्तन में हर वर्ष लगभग 20 मिनट की देरी होती है। इस प्रकार 3 वर्षों में लगभग 1 घंटे का अंतर, 72 वर्षों में 24 घंटे यानी 1 दिन का अंतर हो जाता है। चूंकि सूर्य और चंद्रमा अपने मार्ग में पीछे नहीं चलते, इसलिए हर 72 वर्षों में संक्रांति की तिथि एक दिन आगे बढ़ जाती है।
2080 तक 15 जनवरी को ही संक्रांति
ज्योतिषविद् आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार, इस गणना के आधार पर वर्ष 2080 तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी। इसके बाद संक्रांति की तिथि बढ़कर 16 जनवरी हो जाएगी।
हालांकि 72 वर्षों का यह चक्र वर्ष 2008 में ही पूरा हो गया था, लेकिन कुछ वर्षों तक सूर्य का राशि परिवर्तन प्रातः काल में होने के कारण पूर्वकाल मानकर मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाती रही।
पहले कब-कब मनाई जाती थी मकर संक्रांति?
- 1936 से पहले: 14 जनवरी
- 1864 से 1936: 13 जनवरी
- 1792 से 1863: 12 जनवरी
विशेष बात यह है कि 12 जनवरी 1863, जब स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था, उस दिन मकर संक्रांति का पर्व था।
इस वर्ष का योग और धार्मिक महत्व
इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व वृद्धि योग, शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि, ज्येष्ठा नक्षत्र और गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन साधारण नदी में स्नान भी गंगा स्नान के समान पुण्यकारी माना गया है।
राशि के अनुसार करें दान
मकर संक्रांति के दिन स्नान-दान का विशेष महत्व है। जातक अपनी राशि के अनुसार दान कर पुण्य अर्जित कर सकते हैं। इस दिन किसी का अपमान न करें, पेड़ न काटें और तुलसी की पत्तियां न तोड़ें।
- मेषः लाल मिर्च, लाल वस्त्र, मसूर दाल
- वृषभः सफेद तिल के लड्डू, चावल, चीनी
- मिथुनः हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत मूंग
- कर्कः जरूरतमंदों को सफेद वस्त्र, घी
- सिंहः गुड़, चिक्की, शहद, मूंगफली का दान
- कन्याः मूंग दाल की खिचड़ी बनाकर जरूरतमंदों को खिलाएं
- तुलाः सफेद वस्त्र, मखाना, चावल, चीनी
- वृश्चिकः मूंगफली, गुड़, लाल रंग के गर्म कपड़े
- धनुः पीले वस्त्र, केले, बेसन, चने की दाल
- मकरः काले तिल के लड्डू, कंबल
- कुंभः ऊनी कपड़े, सरसों तेल, जूता-चप्पल
- मीनः पीली सरसों, चने की दाल, मौसमी फल