नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। नवग्रह में न्याय देवता कहे जाने वाले शनि रविवार को मीन राशि में वक्री होंगे। शनि का वक्रत्वकाल 28 नवंबर तक रहेगा। ज्योतिष के जानकारों के अनुसार आने वाले चार माह मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मीन तथा मकर राशि वालों के लिए बेहतर रहेंगे। भाग्य का साथ मिलेगा, इससे रुके हुए कामों में गति आएगी। शारीरिक, मानसिक व आर्थिक समस्याओं से भी निजात मिलेगी। शनि के वक्री होते ही सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक व प्राकृतिक परिवर्तन की स्थिति बनेगी। शनि की प्रसन्नता के उपाय करने से राहत तथा अनुकूलता अनुभव होगी।
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया विभिन्न राशि वाले जातक लंबे समय से मानसिक तनाव, चिंता, आर्थिक परेशानी का अनुभव कर रहे हैं। कुछ जातकों के मांगलिक कार्यों में अवरोध आ रहे हैं। कुछ पारिवारिक विवाद, लड़ाई झगड़ों से परेशान हैं। ऐसे जातकों के लिए अच्छी खबर यह कि आज रविवार से शनि मीन राशि में वक्री हो रहे हैं। शनि के वक्री होते ही विशेष रूप से मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मीन, मकर राशि वाले जातकों को राहत मिलेगी। मीन, मकर राशि वाले राहत का अनुभव करेंगे। वहीं मेष राशि वाले जातकों को विशेष पद की प्राप्ति होगी। सिंह और धनु राशि वाले जातकों को ढैय्या सहयोग प्रदान करेगा, इससे रुके कार्य आगे बढ़ेंगे तनाव समाप्त होंगे। मिथुन कन्या राशि वाले जातकों को संपत्ति में निवेश के साथ लाभ की प्राप्ति होगी स्वास्थ्य के प्रति ध्यान रखने की भी आवश्यकता रहेगी।
पं.डब्बावाला ने बताया शनि के वक्रत्वकाल में शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए बारह राशि के जातक यह उपाय कर सकते हैं। सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर शनि स्तोत्र, शनि अष्टक, महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र में से किसी एक का पाठ कर सकते हैं। शनि महाराज का तिल्ली के तेल से अभिषेक, भिक्षुओं को भोजन, काले वस्त्र, लोहे की वस्तुएं आदि का दान करने से शनि की अनुकूलता प्राप्त होगी।
उज्जैन में ज्योतिर्लिंग महाकाल के साथ ही चौरासी महादेव भी विराजित है। श्रावण मास में इनकी पूजा अर्चना करने से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है। नईपेठ में चौरासी महादेव में से एक श्री स्थावरेश्वर महादेव का मंदिर है। इस मंदिर में भगवान शनिदेव शिवलिंग रूप में विराजित है। पुजारी पं.जितेंद्र शर्मा ने बताया यहां शनि देव का तेलाभिषेक करने तथा शनिदेव को प्रिय वस्तुएं जैसे काला कपड़ा, काले तिल, काले उड़द, लोह पात्र आदि अर्पित करने से भक्तों की मनोकामना शीघ्र पूरी होती है। श्रावण में भक्त शिवलिंग रूप में विराजित शनिदेव का जलाभिषेक भी करते हैं।
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