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शारदीय नवरात्र : बारह वर्ष बाद देवगुरु बृहस्पति होंगे अपनी उच्च राशि कर्क में, बनेगा मंगलकारी काहल योग

शक्ति के नौ स्वरूप की उपासना का नवरात्र 11 अक्टूबर से आस्था और उल्लास के साथ प्रारंभ हो गया है। इस बार माता का आगमन समृद्दि के प्रतीक गज पर हुआ है। पह...और पढ़ें

By ramkrashna MuleEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 10:19:05 AM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 10:19:05 AM (IST)
शारदीय नवरात्र : बारह वर्ष बाद देवगुरु बृहस्पति होंगे अपनी उच्च राशि कर्क में, बनेगा मंगलकारी काहल योग
इंदौर में मां बिजासन का आकर्षक शृंगार। -नईदुनिया

HighLights

  1. सप्तमी तिथि की वृद्धि से अष्टमी-नवमी एक दिन
  2. पहले दिन चंद्रमा तुला राशि में प्रवेश से विशेष योग बन रहा है
  3. 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी पूजन साथ होगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : शक्ति के नौ स्वरूप की उपासना का नवरात्र 11 अक्टूबर से आस्था और उल्लास के साथ प्रारंभ हो गया है। इस बार माता का आगमन समृद्दि के प्रतीक गज पर हुआ है। पहले दिन चंद्रमा तुला राशि में प्रवेश से विशेष योग बन रहा है। साथ ही 12 वर्ष बाद देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में रहने से पूरे पर्व में शुभ फल प्रदान करेंगे। 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी पूजन साथ होगा और 20 को दशहरा मनाया जाएगा।

ज्योतिर्विदों के अनुसार नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना को अभिजित मुहूर्त में करना श्रेयस्कर है। साथ ही पद्म योग के साथ गुरु उच्च राशि कर्क में स्थित होने से मंगलकारी काहल योग बनेगा जो साधना में सफलता प्रदान करने वाला है।


मध्यप्रदेश ज्योतिष एवं विद्वत परिषद के अध्यक्ष आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि चित्रा पक्षीय अयनांश आधारित पंचांगों ने नवरात्र में सप्तमी तिथि की वृद्धि बताई है। यह 17 अक्टूबर एवं 18 अक्टूबर को रहेगी। पंचांगों ने अष्टमी एवं महानवमी का पर्व 19 अक्टूबर सोमवार को बताया है।

हालांकि कुछ पंचांग कर्ताओं ने 18 अक्टूबर रविवार को महाष्टमी एवं 19 सोमवार को महानवमी का पर्व बताया है।आचार्य शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार 20 अक्टूबर मंगलवार को दोपहर 12.49 बजे तक दुर्गा नवमी का बलिदान होगा। इसके बाद श्रवण नक्षत्र युक्त अपरान्ह व्यापिनी विजयादशमी पर शमी पूजन किया जाएगा। इस वर्ष माता का आगमन हाथी पर होगा, जिसे ज्योतिष गणना में समृद्धि दायक बताया गया है।

सनातन संस्कृति में नारी शक्ति के सम्मान का पर्व

ज्योतिर्विद् विनायक शास्त्री के अनुसार वर्ष में चार नवरात्र आते है। शारदीय नवरात्र सनातन संस्कृति में नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक पर्व है। इसमें मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौर और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। पहले दिन कलश स्थापनाकर दवी आव्हान किया जाता है। इसे शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। शक्ति की आराधना और गरबों का उल्लास समाहित है।

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