
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में सृष्टि के प्रथम शिल्पकार, आर्किटेक्ट और निर्माण और तकनीक के देवता भगवान विश्वकर्मा की पूजा का विशेष धार्मिक और व्यावहारिक महत्व है। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही देवताओं के स्वर्गलोक, इंद्रपुरी, माता सीता के लिए स्वर्ण की लंका, द्वारका नगरी तथा सुदर्शन चक्र, त्रिशूल और पुष्पक विमान जैसे दिव्य अस्त्र-शस्त्रों और वाहनों का निर्माण किया था।
आधुनिक युग में इंजीनियरों, कारीगरों, श्रमिकों और उद्योगपतियों द्वारा अपने कार्यस्थलों, फैक्ट्रियों, दुकानों और मशीनों की समृद्धि व सुरक्षा के लिए यह पर्व अत्यंत श्रद्धा से मनाया जाता है।
विश्वकर्मा पूजा पर अपने व्यापार, कारखाने और उपकरणों की पूजा के लिए निम्नलिखित शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे-
1. जय हो जय हो विश्वकर्मा भगवान
जय हो जय हो विश्वकर्मा भगवान, तेरी जग में है ऊंची शान।
आपने शिव को त्रिशूल दिया, विष्णु को सुदर्शन,
दुर्गा मैया को देके खड्ग किया प्रसन्न।
वज्र इंद्र राजा को, ब्रह्मा को कमंडल,
गदा दिए यम को जिससे कांपे भूमंडल,
सभी करते तेरा गुणगान... जय हो जय हो।
प्रभु सारे संसार को हुनर तुम सिखाते,
तेरी दया से सब हैं खाते कमाते।
बिगड़ी सभी की प्रभु तुम हो बनाते,
किसानों-मजदूरों के गुरु तुम कहाते... जय हो जय हो।
2. जय बोलो विश्वकर्मा भगवान की
जय बोलो विश्वकर्मा भगवान की, आओ उत्सव मनाएं देव महान की।
सारी दुनिया को जिसने सजाया है, मौका उनको सजाने का आया है।
कला का कौशल दिखाने वाले, उंगली से दुनिया चलाने वाले,
ऐसा इंजीनियर कोई देखा न दूजा, आज करेंगे हम इनकी ही पूजा।
जिसने सोने का लंका बनाया है, मौका उनको सजाने का आया है...
जय बोलो विश्वकर्मा भगवान की।
3. थाकी मूरत प्यारी घणी लागे (राजस्थानी लोक भजन)
हो थाकी मूरत प्यारी घणी लागे, म्हानै विश्वकर्मा जी भगवान।
सर्व कला में निपुण जो, रचयिता जगत के महान।
वंदन उनको बारबार, श्री विश्वकर्मा भगवान॥
सोने चांदी सूं शिल्प रचायो, गढ़या स्वर्ग रा द्वार,
शंभु के आग्रह पे आपने लंका दी थी बनाए,
कृष्ण कन्हैया के आग्रह पर, द्वारिका दिन्ही बनाए...
थाकी मूरत प्यारी लागे, म्हारा विश्वकर्मा दातार।
4. अगर विश्व में विश्वकर्मा न होते
ये मशीनें, ये पुर्जे, ये फ़रमा ना होते... अगर विश्व में विश्वकर्मा ना होते॥
ये कल-कारखाने, ये मजदूर मिले, ये छैनी-हथौड़े, ये पेंच और कीले।
ये अद्भुत हुनर कारीगर भी ना होते... अगर विश्व में विश्वकर्मा ना होते॥
ये विज्ञान का ज्ञान, दुनिया से जुड़ना, जहाजों का उड़ना, इशारों से मुड़ना।
ये बिल्डिंगें, ये इमारतें, ये बाइक, ये कारें...
सुशोभित हमारे घरों में ना होते, अगर विश्व में विश्वकर्मा ना होते॥
कार्यक्षेत्र में समृद्धि और मशीनों के सुचारू संचालन के लिए पूजा के दिन निम्नलिखित वस्तुओं की साफ-सफाई कर तिलक और रोली से पूजन करना चाहिए-
(नोट: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं, सनातन ग्रंथों और पंचांगीय गणनाओं पर आधारित है।)