Vivah Panchmi 2019: इस कारण विवाह पंचमी को नहीं होते हैं विवाह, जानिए श्रीराम-सीता विवाह की शुभविधि और मुहूर्त
Vivah Panchmi 2019: विवाह पंचनी के दिन मिथिलांचल के लोग अपनी बेटियों का विवाह नहीं करते हैं। ...और पढ़ें
By Yogendra SharmaEdited By: Yogendra Sharma
Publish Date: Sat, 30 Nov 2019 04:36:43 PM (IST)Updated Date: Sat, 30 Nov 2019 04:36:43 PM (IST)

मल्डीमीडिया डेस्क। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का विवाह मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हुआ था। इसलिए इस दिन नेपाल और बिहार के मिथिालांचल में इस पर्व को उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम के भक्त देवी सीता के साथ उनका परिणय संस्कार संपन्न करवाते हैं। और नवविवाहित जोड़े से सुख-समृद्धि और धन-धान्य का आशीर्वाद मांगते हैं।
इस विधि से कराएं श्रीराम-सीता विवाह
इस दिन सूर्योदय के पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाए। श्रीराम-सीता के विवाह का संकल्प लें। मंगल परिणय के कार्यक्रम की शुरूआत करें। एक पाट बिछाकर श्रीराम और देवी सीता की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। श्रीराम- सीता की कुमकुम, अक्षत, हल्दी, मेहदी, अबीर, गुलाल, सुगंधित फूल आदि से पूजा करें। श्रीराम को पीले और देवी सीता को लाल वस्त्र समर्पित करें। पंचामृत, पंचमेवा, मिष्ठान्न, ऋतुफल चढ़ाएं। वर-वधू बने श्रीराम-सीता के समक्ष रामायण के बालकांड में वर्णित विवाह प्रसंग का पाठ करें।
विवाह पंचमी की तिथि और शुभ मुहूर्त
विवाह पंचमी की तिथि -1 दिसंबर 2019, रविवार
पंचमी तिथि का प्रारंभ - 30 नवंबर 2019 को शाम 6 बजकर 5 मिनट से
पंचमी तिथि की समाप्ति - 1 दिसंबर 2019 को शाम 7 बजकर 13 मिनट पर
विवाह पंचमी पर पूरी होती है यह मनोकामनाएं
विवाह पंचमी के दिन विधि-विधान से श्रीराम-सीता का विवाह करने और उनकी पूजा करने से विवाह में आ रही दिक्कतें समाप्त होती है। मनचाहे विवाह के लिए इस दिन श्रीराम-सीता की आराधना करें। श्रीराम-सीता की उपासना से पारिवारिक समस्याओं और कलह का अंत हो जाता है। इस दिन रामचरित मानस या बालकांड में वर्णित सीताराम के विवाह प्रसंग का पाठ करना शुभ होता है।
विवाह पंचमी के दिन विवाह का है निषेध
मानय्ता है कि विवाह पंचमी के दिन विवाह संस्कार संपन्न नहीं किए जाते हैं। विशेष तौर पर मिथिलांचल और नेपाल में इस दिन विवाह समारोह नहीं करने की परंपरा है। ऐसा इसलिए किया जाता है, क्योंकि सीता को वैवाहिक जीवन में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा था, इसलिए मिथिलावासी आज भी इस दिन को विवाह के लिए अच्छा नहीं मानते हैं।