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परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु करवट क्यों बदलते हैं? जानें धार्मिक महत्व और पूरी कहानी

धार्मिक मान्यताओं में, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु का योग निद्रा में रहना एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। इस दौरान भगवान विष्णु के सोने की मुद्रा...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Sat, 19 Sep 2026 06:51:19 PM (IST)Updated Date: Sat, 19 Sep 2026 06:58:08 PM (IST)
परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु करवट क्यों बदलते हैं? जानें धार्मिक महत्व और पूरी कहानी
परिवर्तिनी एकादशी।

HighLights

  1. परिवर्तिनी एकादशी भगवान विष्णु और चातुर्मास से जुड़ी है।
  2. इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं।
  3. इसके बाद देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु जागते हैं।

धर्म डेस्‍क। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी या 'करवट बदलने वाली एकादशी' कहा जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित यह त्योहार सिर्फ व्रत और पूजा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे एक खास धार्मिक मान्यता भी जुड़ी हुई है। इस एकादशी का चातुर्मास में भगवान विष्णु की नींद से गहरा संबंध माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा में करवट बदलते हैं। इसलिए, माना जाता है कि इस एकादशी का नाम परिवर्तिनी एकादशी पड़ा।

परिवर्तिनी एकादशी कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद सुद एकादशी तिथि 21 सितंबर 2026 को रात 8 बजे शुरू होगी और 22 सितंबर 2026 को रात 9:43 बजे खत्म होगी। उदया तिथि के आधार पर, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर 2026 को रखा जाएगा।


इसे करवट बदल एकादशी क्यों कहते हैं?

कहा जाता है कि परिवर्तिनी एकादशी का नाम भगवान विष्णु की योग निद्रा से जुड़ी धार्मिक मान्यता के कारण पड़ा। माना जाता है कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर योग निद्रा में रहते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के बीच में पड़ने वाली इस एकादशी पर भगवान विष्णु सोते हुए करवट बदलते हैं। इसीलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है।

इस एकादशी को पार्श्व एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यहां, ‘परिवर्तन’ या ‘पार्श्व परिवर्तन’ शब्द भगवान विष्णु के सोने की मुद्रा बदलने से जुड़ा है।

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भगवान विष्णु के सोने की मुद्रा बदलने का क्या महत्व है?

धार्मिक मान्यताओं में, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु का योग निद्रा में रहना एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। इस दौरान भगवान विष्णु के सोने की मुद्रा से जुड़ी कई धार्मिक परंपराएं प्रचलित हैं। पार्श्व एकादशी इसी क्रम में एक खास पड़ाव मानी जाती है।

मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु अपनी सोने की मुद्रा बदलते हैं। इसलिए भक्त इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा और आराधना करते हैं। कई लोग आस्था के साथ एकादशी का व्रत भी रखते हैं और भगवान से सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

परिवर्तिनी एकादशी से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं

  • परिवर्तिनी एकादशी भगवान विष्णु और चातुर्मास से जुड़ी है।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ सुद एकादशी, यानी देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास के दौरान सो जाते हैं।
  • इसके बाद माना जाता है कि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु जागते हैं।
  • ऐसा माना जाता है कि इन दोनों मौकों के बीच पड़ने वाली परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु अपनी नींद बदलते हैं।
  • इसी वजह से, इस एकादशी को भगवान विष्णु की योगनिद्रा से जुड़ा एक खास दिन माना जाता है।
  • भक्त इस दिन भगवान विष्णु का व्रत, पूजा और स्मरण करते हैं और परिवार की सुख, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।
  • ध्यान देने वाली बात यह है कि ऊपर दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है।