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खेल देखते-देखते बन गए खिलाड़ी, एशियन गेम्स में देवास के जय मीणा ने जीता कांस्य पदक

अगर कोई कहे कि किसी विद्यार्थी को स्कूल से निकाल दिया गया हो और कोई उसे एडमिशन देने को राजी न हो..लेकिन वही विद्यार्थी आगे चलकर भारत का प्रतिनिधित्व क...और पढ़ें

By Chandra Prakasha SharmaEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Wed, 23 Sep 2026 08:22:57 PM (IST)Updated Date: Wed, 23 Sep 2026 08:22:57 PM (IST)
खेल देखते-देखते बन गए खिलाड़ी, एशियन गेम्स में देवास के जय मीणा ने जीता कांस्य पदक
पदक जीतने के बाद कोच सुदेश सांगते के साथ सॉफ्ट टेनिस खिलाड़ी जय मीणा। (सौजन्य)

HighLights

  1. पहली बार सॉफ्ट टेनिस में भारत को दिलाया मेडल
  2. बेटे से बात कर छलक पड़े मां-भाई के आंसू
  3. जय मीणा ने कहा- पिछली हार से टूट गया था

नईदुनिया प्रतिनिधि, देवास: अगर कोई कहे कि किसी विद्यार्थी को स्कूल से निकाल दिया गया हो और कोई उसे एडमिशन देने को राजी न हो..लेकिन वही विद्यार्थी आगे चलकर भारत का प्रतिनिधित्व करे और एशियन गेम्स में पदक जीते तो आप क्या कहेंगे...। यह कहानी नहीं, हकीकत है।

एशियन गेम्स में देवास के जय मीणा ने साफ्टटेनिस में भारत को पहली बार पदक दिलाया और इसी चैंपियनशिप में पुरानी हार के जख्मों को भरा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी एशियन गेम्स में पदक विजेता खिलाड़ियों को बधाई दी।


जय मीणा की कहानी बाकी खिलाड़ियों से अलग है। बचपन से जय गली क्रिकेट खेलता था, जहां अक्सर विवाद भी होते थे। जब चौथी कक्षा में था तो स्कूल से निकाल दिया गया। जय के पिता ने साफ्ट टेनिस कोच सुदेश सांगते से बात की और पायोनियर स्कूल में दाखिला करवाया।

यहीं से एक ऐसा खिलाड़ी तैयार हुआ, जिसने देवास ही नहीं देश-प्रदेश का मान बढ़ाया। बेटे की उपलब्धि से मां की आंखों में आंसू आए और वीडियो काल पर उससे बात कर बधाई दी। पिता हौसला बनकर जय के साथ थे और गर्व से उनका सीना चौड़ा था कि उनके बेटे ने आज वह कर दिखाया, जिसका सपना सालों से देख रहे।

खेल देखते-देखते बने खिलाड़ी

जय मीणा का साफ्ट टेनिस से जुड़ाव भी काफी दिलचस्प रहा। पायोनियर पब्लिक स्कूल, देवास में पढ़ाई के दौरान उन्होंने पहली बार साफ्ट टेनिस का कोर्ट देखा। शुरुआत में वे केवल खेल देखने के लिए वहां रुकते थे और बाद में खिलाड़ियों के लिए बाल बाय की भूमिका निभाने लगे। धीरे-धीरे इस खेल के प्रति उनकी रुचि बढ़ी और उन्होंने खुद रैकेट थाम लिया। इसके बाद स्कूल और जिला स्तर से शुरू हुआ सफर राज्य और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचा। महज 13 वर्ष की उम्र में जय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने लगे थे।

प्रतियोगितओं में कई मेडल जीते

जय मीणा ने गुजरात में आयोजित 36वें नेशनल गेम्स में पुरुष एकल का स्वर्ण पदक जीता। टीम और डबल्स स्पर्धाओं में भी मध्यप्रदेश के लिए पदक हासिल किए। 2024 में आद्या तिवारी के साथ वर्ल्ड साफ्ट टेनिस चैंपियनशिप के मिक्स्ड डबल्स में कांस्य पदक जीता। यह इस प्रतियोगिता में भारत का पहला पदक था। वर्ष 2025 की एशियन साफ्ट टेनिस चैंपियनशिप में भी जय ने पुरुष एकल में कांस्य पदक हासिल कर इतिहास रचा था। हाल ही में जापान के नागोया में पुरुष एकल के क्वार्टर फाइनल में फिलीपींस के खिलाड़ी को हराया। सेमी फाइनल में मसल्स इंजरी के कारण मीणा मुकाबला हार गए।

यह मेडल ओलिंपिक से कम नहीं- कोच सांगते

जय मीणा के कोच सुदेश सांगते ने बताया कि पहली बार एशियन गेम्स में साफ्टटेनिस में भारत को कांस्य पदक मिली है। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। जय करीब 17 साल से मेरे पास सीख रहा है और काफी मेहनत करता है। उसके नाम कई उपलब्धियां हैं, लेकिन यह बड़ी उपलब्धि है। यह मेडल ओलिंपिक मेडल से कम नहीं है क्योंकि ओलिंपिक में खेलने वाली टीमें एशियन गेम्स में आती हैं। जय के पिता रामेश्वर मीणा वकील हैं। माता गृहिणी है। एक भाई है। मध्यमवर्गीय परिवार है।

शब्दों में बयां नहीं कर सकता

नईदुनिया से बातचीत में जय मीणा ने कहा कि इस उपलब्धि को शब्दों से बयां नहीं कर सकता। कई रातें निराशा में बीते, कई परेशानियां आईं, उसके बाद जाकर खुशी का लम्हा मिला है। क्वार्टर फाइनल का टीम इवेंटस जीतते-जीतते हार गए, मिक्स्ड डबल्स में भी यही हुआ। इसके बाद निराशा हुई और टूट गया।

मुझे लगा कि अब आखिरी मौका है। कर सकूंगा या नहीं, लेकिन मेरे कोच सुदेश सांगते ने मेरा हौसला बढ़ाया और कहा कि निराश नहीं होना। जो बीत गया उसे भूलो, आने वाले पर ध्यान दो। उनके भरोसे और हौसले की बदौलत यह मेडल मिला। पिता मेरे मैच देखने के लिए जापान आए हुए हैं।

मां और भाई से फोन पर बात की। वे रो रहे थे। खुशी के आंसू झलक रहे थे क्योंकि सालों का इंतजार आज खत्म हुआ। पिछले एशियन गेम्स में मिली हार को इस मेडल ने भूला दिया। चौथी कक्षा में था तो स्कूल से निकाल दिया था। कोई एडमिशन नहीं दे रहा था। पिता ने सुदेश सांगते सर से बात कर पायोनियर में एडमिशन करवाया और यहीं से साफ्टटेनिस का सफर शुरू हुआ, जिसकी बदौलत आज यह मुकाम मिला है।

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