
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। यूपीआई भुगतान से जुड़े नए नियमों में बदलाव यानी दो हजार रुपये से अधिक राशि पर मर्चेंट टैक्स लागू होने से पहले ही उनका नकारात्मक असर शहर में दिखने लगा है। कई कारोबारियों ने डिजिटल भुगतान से दूरी बनाते हुए नकद लेनदेन को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। व्यापारियों का कहना है कि नियमों में बदलाव से लेनदेन पर शुल्क लगेगा और अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है। ऐसे में वे कारोबार में होने वाले खर्च और संभावित नुकसान को लेकर चिंता में हैं।
वहीं ऑनलाइन ड्रापशिपिंग कंपनी से खरीदी के दौरान भी यह समस्या देखने को मिल रही है। हालांकि शासन जिस यूपीआई भुगतान में बदले नियमों को जहां 15 अक्टूबर से लागू करने वाला था, वहां अब संभवत: इसे जनवरी तक टाल देने की बात भी सामने आ रही है। शहर के व्यापारिक संगठन लगातार शासन द्वारा किए गए इस बदलाव को निरस्त करने की मांग करते हुए अपना विरोध दर्ज करवा रहे हैं।
शहर के छोटे दुकानदार और रोजाना बड़ी संख्या में लेनदेन करने वाले कारोबारी नकद भुगतान पर जोर दे रहे हैं। उनका मानना है कि यदि डिजिटल भुगतान से जुड़े नियमों के कारण अतिरिक्त कर या शुल्क का बोझ बढ़ता है, तो इसका सीधा असर उनके मुनाफे पर पड़ेगा। इसी आशंका के चलते व्यापारी ग्राहकों से नकद भुगतान लेने को प्राथमिकता दे रहे हैं। चाहे दो हजार रुपये से अधिक का भुगतान हो या फिर 150 रुपए का सामान्य भुगतान, व्यापारी सिर्फ नकद लेनदेन ही कर रहे हैं।
शहर के हजीरा निवारी कबीर बताते हैं कि उन्होंने हाल ही में एक पार्सल एक ड्रापशिपिंग साइट से मंगवाया था। डिलीवरी पार्टनर जब उन्हें पार्सल देने आया तो उसका भुगतान 1500 रुपये के लगभग करना था। संबंधित व्यक्ति ने यह भुगतान नकद में करने पर जोर दिया और यूपीआई से भुगतान लेने से साफ शब्दों में मना कर दिया।
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आदेश को स्थगित करने से त्योहार तो ढंग से कटेंगे, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह सही बदलाव नहीं है। सरकार संशोधन की बात तो कर रही है लेकिन यह आदेश व्यापारियों के हित में नहीं है, इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। - भूपेंद्र जैन, प्रदेश अध्यक्ष, कैट।
व्यापारियों पर यूपीआई के माध्यम से लेनदेन पर लगाए जाने वाला यह शुल्क अतिरिक्त बोझ बनेगा। सरकार को इस नियम को वापस लेते हुए निरस्त कर देना चाहिए। अन्यथा व्यापारी डिजिटल भुगतान से दूरी बना लेगा। -प्रवीण अग्रवाल, अध्यक्ष, चैंबर ऑफ कॉमर्स।