
टेक्नोलॉजी डेस्क। लोग अक्सर दिन भर फोन का इस्तेमाल करते हैं और रात को बिस्तर पर लेटकर बैटरी खत्म होने तक चलाते रहते हैं। फिर सुबह 100% चार्ज पाने के चक्कर में उसे रातभर के लिए चार्जिंग पर छोड़ देते हैं, लेकिन यह लापरवाही बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
कई लोगों का मानना है कि नए स्मार्टफोन्स में ऑटो कट-ऑफ फीचर होता है, जो बैटरी फुल होते ही चार्जिंग रोक देता है। तकनीकी रूप से यह सही है, लेकिन बैकग्राउंड में ऐप्स और इंटरनेट ऑन रहने से बैटरी 99% पर आते ही फिर से चार्ज होने लगती है।
ट्रिकल चार्जिंग का दबाव: रातभर चलने वाले इस प्रोसेस को ट्रिकल चार्जिंग कहते हैं, जिससे लिथियम-आयन बैटरी की केमिस्ट्री बिगड़ने लगती है।
बैटरी हेल्थ में गिरावट: लगातार दबाव के कारण बैटरी की लाइफ तेजी से घटती है, फोन गर्म होने लगता है और बैटरी फूलने का खतरा बढ़ जाता है।
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चार्जिंग के दौरान हर स्मार्टफोन से हीट निकलती है। ज्यादातर लोग फोन को चार्जिंग पर लगाकर बिस्तर के गद्दे, तकिए या कंबल के नीचे रख देते हैं। कपड़े से ढके होने के कारण वेंटिलेशन नहीं मिलता और हीट बाहर नहीं निकल पाती। ऐसे में वोल्टेज का उतार-चढ़ाव होने पर शॉर्ट सर्किट और थर्मल रनवे की स्थिति बन जाती है, जिससे फोन में जोरदार धमाका हो सकता है और बिस्तर में आग लग सकती है।