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ऑटो डेस्क। नई कार खरीदना हर किसी के लिए एक बेहद खास और यादगार पल होता है। शोरूम से नई चमचमाती गाड़ी घर लाने का उत्साह इतना अधिक होता है कि लोग अक्सर कागजी कार्रवाई और चाबी लेने की जल्दबाजी में जरूरी जांच करना भूल जाते हैं। इस जल्दबाजी के चलते गाड़ी में मौजूद छोटे-मोटे डेंट, पेंट का शेड मिसमैच या तकनीकी खामियां नजरअंदाज हो जाती हैं। याद रखें, एक बार आपने डिलीवरी पेपर्स पर दस्तखत कर दिए, उसके बाद गाड़ी पर दिखने वाले किसी भी स्क्रैच या खराबी के लिए डीलर जिम्मेदार नहीं होगा।
यही वजह है कि डिलीवरी लेने से पहले PDI (प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन) करना बेहद आवश्यक है। आइए जानते हैं कि नई कार की डिलीवरी लेते समय आपको किन महत्वपूर्ण बातों की जांच जरूर करनी चाहिए।
दिन की रोशनी में ही करें जांच: PDI कभी भी शाम के अंधेरे में, कम रोशनी वाली अंडरग्राउंड बेसमेंट पार्किंग या बारिश के दौरान न करें। भरपूर प्राकृतिक धूप में ही पेंट के बारीक स्क्रैच, हलके डेंट और पैनल का मिस-अलाइनमेंट साफ नजर आते हैं।
जल्दबाजी बिल्कुल न दिखाएं: डिलीवरी के समय डीलरशिप कर्मचारी औपचारिकताएं जल्दी पूरी करने का दबाव बना सकते हैं। आप बिल्कुल न घबराएं और गाड़ी की तसल्ली से जांच करने के लिए कम से कम 45 मिनट से 1 घंटे का समय निकालें।
पेंट और डेंट चेक करें: कार की पूरी बॉडी, बंपर, रूफ और दरवाजों को अलग-अलग एंगल से देखें कि कहीं कोई खरोंच, डेंट या रंग में असमानता (री-पेंटिंग का संकेत) तो नहीं है।
पैनल गैप्स (Panel Gaps): बोनट, दरवाजे, बूट (डिक्की) और फेंडर्स के बीच का गैप दोनों तरफ एक समान होना चाहिए। यदि गैप असामान्य है, तो यह असेंबली डिफेक्ट या ट्रांसपोर्टेशन के दौरान हुई टक्कर का संकेत हो सकता है।
ग्लास और लाइट्स: विंडशील्ड, खिड़कियों और रियर ग्लास पर कोई बारीक दरार या स्क्रैच न हो। साथ ही हेडलाइट्स और टेललाइट्स को ऑन करके देखें कि उनके लेंस के अंदर नमी या पानी की बूंदें तो नहीं जम रही हैं।
टायर्स का DOT कोड: टायरों की साइडवॉल पर 4 अंकों का DOT कोड लिखा होता है, जो उनके निर्माण का हफ्ता और साल दर्शाता है। इसे जरूर चेक करें ताकि डीलर गाड़ी में पुराना स्टॉक या पुराने टायर न लगा दे।
केबिन और सीटें: सीट कवर्स, रूफ लाइनर, फ्लोर कारपेट और डैशबोर्ड पर किसी तरह के दाग, फटने के निशान या ढीली सिलाई की जांच करें।
इलेक्ट्रिकल फीचर्स का टेस्ट: इग्निशन ऑन करके सभी पावर विंडो, हॉर्न, वाइपर, इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल साइड मिरर्स, टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम, रिवर्स पार्किंग कैमरा और स्पीकर्स को चलाकर देखें।
एसी व क्लाइमेट कंट्रोल: एयर कंडीशनर को फुल ब्लोअर और अधिकतम कूलिंग पर चलाकर देखें। सुनिश्चित करें कि सभी एसी वेंट्स से ठंडी हवा आ रही हो और यदि कार में वेंटिलेटेड सीट्स हैं, तो उनकी वर्किंग भी परखें।
मीटर कंसोल व वॉर्निंग लाइट्स: इंजन स्टार्ट करने के कुछ सेकंड बाद स्पीडोमीटर क्लस्टर पर 'चेक इंजन', 'ABS' या 'एयरबैग' जैसी कोई भी चेतावनी वाली लाइट जली नहीं रहनी चाहिए।
इंजन बे की सफाई: बोनट खोलकर देखें कि इंजन कंपार्टमेंट साफ-सुथरा हो; उस पर अतिरिक्त धूल, कीचड़ या जंग के निशान नहीं होने चाहिए।
फ्लुइड्स का स्तर: इंजन ऑयल, कूलेंट, ब्रेक ऑयल और विंडशील्ड वॉशर फ्लुइड का लेवल निर्धारित निशान के अनुसार पूरा होना चाहिए।
वायरिंग और लीकेज: किसी भी तार का कटा होना, चूहों के कुतरने के निशान या गाड़ी के नीचे किसी तरल पदार्थ (ऑयल/कूलेंट) का रिसाव नहीं दिखना चाहिए।
VIN (व्हीकल आइडेंटिफिकेशन नंबर) का मिलान
कार की बॉडी पर पंच किए गए 17 अंकों के VIN नंबर को अपने अलॉटमेंट लेटर, इंश्योरेंस पेपर और इनवॉइस (बिल) से अक्षर-दर-अक्षर मिलाएं। यह नंबर आमतौर पर ड्राइवर साइड के बी-पिलर, इंजन बे या फ्रंट पैसेंजर सीट के नीचे स्थित होता है। VIN नंबर से कार के निर्माण का सही महीना और साल स्पष्ट हो जाता है, जिससे आप डीलर द्वारा कई महीने पुरानी या स्टॉक में खड़ी पुरानी गाड़ी बेचे जाने से सुरक्षित रहते हैं।