वाराणसी: सपा से जुड़े ग्राम प्रधान की रिहाई को लेकर भाजपा पदाधिकारियों का थाने पर धरना, जानिए पूरा मामला
UP News: वाराणसी के लोहता थाना क्षेत्र अंतर्गत कोरौता गांव में सरकारी भूमि पर कथित अवैध निर्माण को लेकर उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब ग्राम प्रधान द्वा ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 04 Jan 2026 04:08:09 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Jan 2026 04:08:09 PM (IST)
सपा से जुड़े ग्राम प्रधान की रिहाई को लेकर भाजपा पदाधिकारियों का थाने पर धरना।HighLights
- सरकारी भूमि पर कथित अवैध निर्माण को लेकर विवाद
- ग्राम प्रधान दिनेश पटेल समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं
- करीब दो घंटे चला धरना, राजनीतिक पहलू भी चर्चा में
डिजिटल डेस्क। वाराणसी के लोहता थाना क्षेत्र अंतर्गत कोरौता गांव में सरकारी भूमि पर कथित अवैध निर्माण को लेकर उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब ग्राम प्रधान द्वारा बुद्ध बिहार पार्क बनाने के उद्देश्य से जबरन मिट्टी गिराने का प्रयास किया गया। पुलिस द्वारा कार्य रोकने के बावजूद ग्राम प्रधान के न मानने पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
घटना की जानकारी मिलते ही गांव के भाजपा पदाधिकारी बड़ी संख्या में लोहता थाने पहुंच गए। इनमें ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि प्रवेश पटेल, भानुशंकर पटेल, प्रमोद पटेल, सर्वेश पटेल, आनंद पटेल, अभय पटेल और धीरज साहू सहित कई कार्यकर्ता शामिल थे। भाजपा नेताओं ने थाने के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया और कुछ समय के लिए चक्का जाम भी कर दिया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
ग्राम प्रधान दिनेश पटेल समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं
बताया जा रहा है कि हिरासत में लिए गए ग्राम प्रधान दिनेश पटेल समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं। जाम की सूचना मिलते ही एसपी रोहनिया राजीव शर्मा मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। काफी देर तक चली बातचीत के बाद प्रधान को निजी मुचलके पर रिहा किया गया, जिसके बाद करीब दो घंटे चला धरना और जाम समाप्त हुआ।
सरकारी भूमि पर पार्क निर्माण का आरोप
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान एसीपी रोहनिया संजीव शर्मा, रोहनिया थाना प्रभारी राजू सिंह, लोहता थाना प्रभारी राजबहादुर मौर्य समेत भारी पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस का कहना है कि सरकारी जमीन पर बिना अनुमति निर्माण करना कानूनन अपराध है और पहले से ही प्रधान सहित कुछ लोगों को पाबंद किया गया था, ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।
सरकारी भूमि पर पार्क निर्माण का यह प्रयास न केवल कानून का उल्लंघन माना जा रहा है, बल्कि प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना भी है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से यह संदेश गया है कि अवैध निर्माण के मामलों में किसी भी स्तर पर ढील नहीं दी जाएगी।
इस मामले में राजनीतिक पहलू भी चर्चा में
हालांकि, इस मामले में राजनीतिक पहलू भी चर्चा में रहा। सपा से जुड़े ग्राम प्रधान के समर्थन में भाजपा पदाधिकारियों द्वारा दिया गया धरना यह दर्शाता है कि कई बार स्थानीय मुद्दों पर दलगत राजनीति पीछे छूट जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों को लेकर प्रशासन को स्वयं पहल करनी चाहिए, ताकि ऐसे विवाद राजनीतिक रंग न लें।
इस घटना ने यह भी संकेत दिया है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद स्थानीय स्तर पर समन्वय की आवश्यकता है। बुद्ध बिहार पार्क का मामला अब केवल निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासन, राजनीति और स्थानीय हितों के बीच संतुलन का प्रतीक बन गया है।