
डिजिटल डेस्क। कहते हैं कि अगर सपनों में जान हो, तो कानपुर की तंग गलियां भी आसमान का रास्ता रोक नहीं सकतीं। यह कहानी है श्रवण कुमार विश्वकर्मा की, जिन्होंने कभी शौक के लिए दोस्तों का टेंपो चलाया, लोहे और सरिया के कारोबार में पसीना बहाया और अब देश के विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) में क्रांति लाने को तैयार हैं। उनकी कंपनी 'शंख एयरलाइन' को नागरिक उड्डयन मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मिल गया है।
श्रवण विश्वकर्मा के लिए यह सिर्फ एक बिजनेस नहीं, बल्कि अपनी जड़ों को दिया गया एक सम्मान है। उन्होंने घोषणा की है कि शंख एयरलाइन का मुख्यालय लखनऊ में होगा। वर्ष 2026 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में इसकी पहली फ्लाइट लखनऊ से दिल्ली या मुंबई के लिए उड़ान भरेगी। इसके बाद कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर जैसे शहरों को सीधे मेट्रो शहरों से जोड़ा जाएगा।
हवाई यात्रियों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर यह है कि शंख एयरलाइन 'डायनमिक प्राइसिंग' के मॉडल पर काम नहीं करेगी। श्रवण का दावा है कि:
यह भी पढ़ें- Meerut News: मेरी जान को खतरा, पत्नी और उसका प्रेमी मार देंगे... पति ने थाने में लगाई मदद की गुहार
कानपुर के लाटूश रोड की गलियों में बचपन बिताने वाले श्रवण बहुत ज्यादा पढ़ाई नहीं कर सके। पिता के निधन के बाद उन्होंने कारोबार की कमान संभाली। दैनिक जागरण से बातचीत में उन्होंने बताया कि
नीचे से ऊपर जाने वाला आदमी साइकिल, बस और टेंपो सब कुछ देखता है। मैंने खुद टेंपो चलाया है और यही जमीनी अनुभव मेरी सबसे बड़ी ताकत है। — श्रवण विश्वकर्मा
शंख एयरलाइन शुरुआत में एयरबस A320 विमानों के साथ बाजार में उतरेगी। कंपनी का लक्ष्य 2026-27 तक अपने बेड़े में 15 से 25 विमान शामिल करने का है। श्रवण का विजन स्पष्ट है वे बड़ी एयरलाइंस से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय एक ऐसी सेवा देना चाहते हैं जो भरोसेमंद और आम आदमी की पहुंच में हो।