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योगी सरकार की सख्ती का असर... NRC नंबर मांगते ही 160 संदिग्ध बांग्लादेशी नौकरी छोड़ भागे

योगी सरकार की सख्ती के बाद, लखनऊ नगर निगम के कूड़ा प्रबंधन कार्य से जुड़े 160 संदिग्ध बांग्लादेशी कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दी। एनआरसी (राष्ट्रीय नागर...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Wed, 03 Dec 2025 10:02:31 PM (IST)Updated Date: Wed, 03 Dec 2025 10:02:31 PM (IST)
योगी सरकार की सख्ती का असर... NRC नंबर मांगते ही 160 संदिग्ध बांग्लादेशी नौकरी छोड़ भागे
160 संदिग्ध बांग्लादेशी नौकरी छोड़ भागे

एजेंसी, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में संदिग्ध बांग्लादेशियों पर निगरानी तेज होने के साथ ही इसका बड़ा असर दिखना शुरू हो गया है। योगी सरकार की सख्ती के बाद सफाई कार्य से जुड़े संदिग्ध बांग्लादेशियों से एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर) नंबर मांगा गया तो वे नंबर दे नहीं पाए और नौकरी छोड़कर भाग खड़े हुए।

एनआरसी ही हकीकत बताने का तरीका

एनआरसी नंबर असम सरकार द्वारा दिया गया है, जिसमें पूर्वजों तक का जिक्र होता है, जो यह साबित करता है कि वे बांग्लादेशी घुसपैठ नहीं हैं। आधार कार्ड तो हर किसी के पास होता है, लेकिन एनआरसी उन्हीं के पास है जो लंबे समय से असम के निवासी थे।


कूड़ा प्रबंधन का काम देख रही नगर निगम की तरफ से अधिकृत संस्था मेसर्स लखनऊ स्वच्छता अभियान प्रबंधन ने सफाई कर्मचारियों से जब एनआरसी नंबर मांगा, तो उनमें से 160 कर्मी नंबर दे नहीं पाए और दबाव पड़ने पर नौकरी छोड़कर चले गए। इससे स्पष्ट होता है कि उनकी असम की नागरिकता संदिग्ध है। पुलिस और खुफिया तंत्र के लिए अब यह जांच का विषय है कि आखिर ये 160 कर्मी कहाँ गए और क्या कर रहे हैं।

नगर निगम में भगदड़ और जोनवार आंकड़े

दरअसल, पिछले कुछ समय से सक्रिय हुई सरकार के कारण संदिग्ध बांग्लादेशियों में भगदड़ मच गई है। महापौर सुषमा खर्कवाल ने भी एक साल से संदिग्ध बांग्लादेशियों को शहर से बाहर करने का अभियान चला रखा है। पिछले साल उन्होंने इंदिरानगर में संदिग्ध बांग्लादेशियों की बस्ती को उजाड़ दिया था।

पिछले दो माह से सख्ती बढ़ने के बाद पुलिस ने नगर निगम में ठेका पाई संस्थाओं से असम का निवासी बताने वाले कर्मचारियों का एनआरसी मांगा था। लखनऊ स्वच्छता अभियान में काम कर रहे ये कर्मचारी आधार कार्ड दिखाने के बावजूद एनआरसी नहीं दे पाए।

कहां से कितने कर्मी काम छोड़कर भागे (नगर निगम के जोन)

  • जोन एक - 38
  • जोन चार - 70
  • जोन तीन - 12
  • जोन छह - 12
  • जोन सात - 36

कंपनी ने इसकी जानकारी महापौर को भी दी है। महापौर ने कंपनी से कहा है कि काम छोड़कर गए कर्मचारियों की गतिविधियां पता करने के लिए पुलिस को उनके मोबाइल नंबर और आधार कार्ड भी उपलब्ध कराए जाएं।

फर्जीवाड़ा और एटीएस की कार्रवाई

गौरतलब है कि हाल ही में आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) ने ठाकुरगंज के बरौरा हुसैनबाड़ी में हिंदू बनकर रह रही एक बांग्लादेशी महिला को गिरफ्तार किया था। नरगिस उर्फ जैसमीन उर्फ निर्मला नाम की यह महिला 2006 में बांग्लादेशी पति के साथ भारत में दाखिल हुई थी। वह फर्जी दस्तावेज बनवाकर निर्मला बनकर रहने और हिंदू त्योहार मनाने के साथ पूजा भी करती थी।

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