
डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश में ओवरलोड वाहनों को अवैध रूप से पास कराने के आरोप में परिवहन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लखनऊ, रायबरेली और फतेहपुर के तीन यात्री कर अधिकारी (पीटीओ) को निलंबित कर दिया है। परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने यह कदम एसटीएफ की जांच और एफआईआर के बाद उठाया।
12 नवंबर को एसटीएफ लखनऊ ने हमीरपुर, महोबा और बुंदेलखंड क्षेत्र में ओवरलोड मौरंग व गिट्टी ले जाने वाले ट्रकों को रिश्वत लेकर पास कराने के बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया था। इसके बाद लखनऊ के मड़ियांव, रायबरेली के लालगंज और उन्नाव में दर्ज तीन अलग-अलग मुकदमों में विभाग के कई अधिकारियों व कर्मचारियों सहित 25 लोगों को नामजद किया गया।
पीटीओ के अलावा उन्नाव, लखनऊ और रायबरेली के पांच प्रवर्तन पर्यवेक्षक, सिपाही और चालक को भी निलंबित कर दिया गया है। इनमें लखनऊ के प्रवर्तन पर्यवेक्षक अनुज, उन्नाव के प्रवर्तन पर्यवेक्षक इंद्रजीत सिंह, प्रवर्तन सिपाही रणजीत कुमार और प्रदीप सिंह तथा रायबरेली के प्रवर्तन चालक नौशाद शामिल हैं।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत मुकदमे दर्ज होने के बाद से आरोपी अधिकारियों ने दफ्तर आना बंद कर दिया था। अदालत द्वारा अग्रिम जमानत सहित अन्य राहत से इनकार किए जाने के बाद विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए निलंबन आदेश जारी किए।
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भ्रष्टाचार मामले में नामजद लखनऊ के एआरटीओ प्रवर्तन राजीव कुमार बंसल, रायबरेली के एआरटीओ अंबुज और फतेहपुर की एआरटीओ पुष्पांजलि मित्रा के खिलाफ भी कार्रवाई तय मानी जा रही है। परिवहन आयुक्त ने तीनों के निलंबन का प्रस्ताव प्रमुख सचिव परिवहन को भेज दिया है। अनुमोदन मिलते ही इन्हें भी सस्पेंड किया जाएगा।
परिवहन आयुक्त ने पूरे मामले की जांच उप परिवहन आयुक्त (नगर परिवहन) विजय कुमार सिंह को सौंपी है। उनसे एक माह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा गया है।