
डिजिटल डेस्क, लखनऊ: बरेली में उपद्रवियों द्वारा शहर को जलाने की साजिश को पुलिस ने विफल कर दिया। मौलाना तौकीर रजा ने सात दिनों तक लगातार भीड़ जुटाने, उन्हें भड़काने और पेट्रोल बम व हथियारों से लैस करने की योजना बनाई थी। उसका मकसद 2010 के दंगों की तरह इस बार भी बरेली को हिंसा की आग में झोंकना था। लेकिन पुलिस की समय रहते की गई कार्रवाई ने पूरे शहर को बड़ी तबाही से बचा लिया।

प्रदर्शन के नाम पर भीड़ जुटाई गई थी। उनके हाथों में चाकू, लाठी-डंडे, पत्थर और पेट्रोल बम थे। पुलिस ने घटनास्थल से ये हथियार बरामद कर लिया और उपद्रवियों को काबू में किया।
पूरे उपद्रव का मास्टरमाइंड मौलाना तौकीर निकला, जिसने पहले भी भड़काऊ भाषण दिए थे। उपद्रव के बाद वह इंटरनेट मीडिया पर लगातार प्रशासन को चुनौती देता रहा। लेकिन आखिरकार उसकी लोकेशन फाईक इन्क्लेव में मिलने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद फाईक इन्क्लेव एक बार फिर चर्चा में आ गया। यही इलाका पहले प्रयागराज में अधिवक्ता उमेश पाल हत्याकांड से भी जुड़ा था। माफिया अतीक अहमद का भाई अशरफ और उसका साला सद्दाम यहां शरण लिए हुए थे। अब मौलाना तौकीर का भी इस इलाके से जुड़ना पुलिस जांच को और गंभीर बना रहा है।
#WATCH | Bareilly, Uttar Pradesh | Heavy police deployment seen in the city following 26 September's protests by a group of people who gathered outside Ala Hazrat Dargah & IMC chief Maulana Tauqeer Raza Khan's house, holding 'I Love Mohammad' placards. The protestors pelted… pic.twitter.com/s4ySJFpoJY
— ANI (@ANI) September 29, 2025
पुलिस की जांच में सामने आया है कि फाईक इन्क्लेव में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर आलीशान कोठियां और भवन बनाए गए। यहां स्मैक तस्करों ने भी शरण ली और अवैध गतिविधियां चलाईं। हाल ही में दो स्मैक तस्करों को गिरफ्तार किया गया था जिनकी संपत्तियां इसी इलाके में थीं।
पुलिस और प्रशासन ने अब फाईक इन्क्लेव और उससे जुड़ी अवैध संपत्तियों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है। रविवार को पीलीभीत रोड स्थित फाहम लान, फ्लोरा गार्डन और स्काईलार्क होटल को सील कर दिया गया। अधिकारियों ने साफ कहा है कि नक्शे के विपरीत बने भवन, सरकारी भूमि और सीलिंग की जमीन पर बने मकानों पर कठोरतम कार्रवाई होगी।
फाईक इन्क्लेव कॉलोनी के अध्यक्ष मो. नासिर का कहना है कि 30 साल पहले यह कॉलोनी बसाई गई थी। इसमें करीब 250 बीघा भूमि शामिल है। नासिर का कहना है कि उन्हें अवैध निर्माण की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन यदि कोई संपत्ति सरकारी भूमि पर बनी है तो प्रशासन कार्रवाई करे।
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