
डिजिटल डेस्क। दीपावली नज़दीक आते ही बाजारों में रौनक तो बढ़ गई है, लेकिन इसके साथ ही मिठाइयों में मिलावट का कारोबार भी चरम पर पहुंच गया है। जहां एक ओर लोग त्योहार के लिए तरह-तरह की मिठाइयां खरीदने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर मिलावटखोर नकली खोवा और सिंथेटिक सामग्री से बने उत्पादों को असली बताकर बेचने में लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, मानिकपुर, मऊ, राजापुर और बरगढ़ जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर सिंथेटिक, हाइड्रो, आलू और रिफाइंड तेल से नकली खोवा तैयार किया जा रहा है। यही खोवा आगे सतना, कटनी, रीवा, बिलासपुर, रायपुर, प्रयागराज और झांसी जैसे शहरों तक पहुंचाया जा रहा है, जहां इसे महंगी मिठाई दुकानों तक सप्लाई किया जाता है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह मिलावटी खोवा नामी ब्रांड की मिठाइयों में इस्तेमाल हो रहा है। शहर के बस स्टैंड, पुरानी बाजार, शंकर बाजार, सिविल लाइंस, एलआईसी रोड और रेलवे स्टेशन रोड जैसे प्रमुख क्षेत्रों की मिठाई दुकानों में इन दिनों ऐसी मिठाइयां बड़े पैमाने पर बिक रही हैं।
मिठाइयां देखने में जितनी आकर्षक हैं, उतनी ही अस्वच्छ परिस्थितियों में तैयार की जा रही हैं। कई जगहों पर मिठाई बनाते समय तेज़ दुर्गंध और गंदगी का माहौल देखा गया है। बाजार में इस समय खोवा की कीमत 320 से 360 रुपये किलो तक पहुंच चुकी है, और अनुमान है कि दीवाली तक यह 400 रुपये के पार जा सकती है।
चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि मिलावटी खोवा और मिठाइयों का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। जिला अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार, इनसे उल्टी, दस्त, पेट दर्द, गले में संक्रमण और यहां तक कि हैजा जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर और भी गंभीर हो सकता है।
हालांकि खाद्य सुरक्षा विभाग ने जांच अभियान चलाने का दावा किया है। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी शशांक त्रिपाठी ने बताया कि कई दुकानों से सैंपल लिए गए हैं और जांच जारी है। मगर मिलावटखोरों की तेजी के मुकाबले प्रशासन की कार्रवाई काफी धीमी नजर आ रही है।
यह भी पढ़ें- BSNL ने यूपी के 142 गांवों में पहुंचाया 4G नेटवर्क, अब कोई गांव नहीं रहेगा नेटवर्क से वंचित
त्योहार की खुशियों में मिठास जरूर घोलें, लेकिन सावधानी के साथ। क्योंकि मीठे के चक्कर में सेहत से समझौता न करें।