
डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश में लगातार छह वर्षों तक बिजली की दरें नहीं बढ़ाने के बाद पावर कॉरपोरेशन ने आखिरकार अगले वित्तीय वर्ष के लिए बढ़ी हुई टैरिफ संरचना की तैयारी शुरू कर दी है। निगम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये का एआरआर (वार्षिक राजस्व आवश्यकता) प्रस्ताव विद्युत नियामक आयोग में जमा किया है, जिसमें लगभग 14 हजार करोड़ रुपये का राजस्व गैप दिखाया गया है। यह गैप यदि आयोग द्वारा मान्य कर लिया जाता है, तो अगले वर्ष बिजली 16% तक महंगी हो सकती है।
राज्य में अगले साल पंचायत चुनाव और 2027 में विधानसभा चुनाव होने के चलते माना जा रहा है कि सरकार किसी भी कीमत पर दरों में बढ़ोतरी नहीं होने देगी। बावजूद इसके, कारपोरेशन ने नियमानुसार तय समय से पहले ही टैरिफ प्रस्ताव आयोग में दाखिल कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार कुल 1.25 लाख करोड़ रुपये का एआरआर
90 हजार करोड़ रुपये बिजली खरीद के लिए
13% वितरण हानि दर्शाई गई
मौजूदा दरों पर 10 हजार करोड़ और ट्रू-अप 2024-25 से 4 हजार करोड़ का घाटा
हालांकि कॉरपोरेशन ने औपचारिक रूप से दर बढ़ाने का प्रस्ताव नहीं दिया है, लेकिन जानकारों का कहना है कि यदि आयोग वितरण हानि और राजस्व अंतर को पूरी तरह मान लेता है, तो 1 अप्रैल 2026 से बिजली दरों में औसतन 16% बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश वर्मा का कहना है कि उपभोक्ताओं का करीब 51 हजार करोड़ रुपये बिजली कंपनियों पर सरप्लस के रूप में पड़ा है। ऐसे में आने वाले पांच वर्षों तक बिजली दरें बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
2025-26 में कंपनियों ने कई संशोधित प्रस्ताव दाखिल किए थे, जिनमें पहले 24 हजार करोड़ के घाटे का हवाला देकर 28% तक बिजली महंगी करने का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन सुनवाई के बाद आयोग ने पाया कि कंपनियों पर उल्टे 18 हजार करोड़ रुपये उपभोक्ताओं के सरप्लस के रूप में पड़े हैं। ऐसी स्थिति में बिजली दरें 13% कम होनी चाहिए थीं, लेकिन कॉरपोरेशन की खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए आई आयोग ने दरों को जैसा है वैसा रखने का आदेश दिया।
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अब निगाहें इस बात पर हैं कि विद्युत नियामक आयोग नए एआरआर प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाता है। चुनावी माहौल को देखते हुए सरकार दरें बढ़ाने से बचेगी या कॉरपोरेशन के तर्कों को प्राथमिकता मिलेगी यह आने वाला समय तय करेगा।