ग्राम प्रधान भाभी ने अपने देवर के खाते में डलवाए विकास कार्यों के पैसे, डीएम ने जारी किया नोटिस
UP News: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के करहल विकासखंड की ग्राम पंचायत तखरऊ में ग्राम प्रधान के खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रधान ने विकास कार्यों के भुगतान अपने देवर के बैंक खाते में कराए। जिलाधिकारी ने प्रधान को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
Publish Date: Sun, 30 Nov 2025 03:51:13 PM (IST)
Updated Date: Sun, 30 Nov 2025 03:53:03 PM (IST)
ग्राम प्रधान भाभी ने अपने देवर के खाते में डलवाए विकास कार्यों के पैसे।HighLights
- शिकायत के बाद जांच में उजागर हुआ मामला
- डीएम का नोटिस, अधिकार सीज होने की स्थिति
- एक वर्ष तक फाइल दबाए रखने का आरोप
डिजिटल डेस्कः उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के करहल विकासखंड की ग्राम पंचायत तखरऊ में ग्राम प्रधान के खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रधान ने विकास कार्यों के भुगतान अपने देवर के बैंक खाते में कराए।
शिकायत की जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद जिलाधिकारी ने प्रधान को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। संतोषजनक जवाब न देने पर प्रधान के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार सीज किए जा सकते हैं। साथ ही तीन सदस्यीय समिति गठित कर ग्राम सभा का संचालन कराया जाएगा।
शिकायत के बाद जांच में उजागर हुआ मामला
ग्राम निवासी सचिन कुमार तिवारी ने 8 अक्टूबर 2024 को आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ग्राम प्रधान नीलम ने विकास कार्यों के नाम पर करीब दो लाख रुपये अपने देवर कमल प्रताप सिंह और पंचायत सहायक के पति के खातों में स्थानांतरित किए।
श्रमिकों के भुगतान के नाम पर रकम देवर के खाते में भेजी
शिकायत पर संज्ञान लेते हुए डीएम ने 11 नवंबर 2024 को बीएसए दीपिका सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त किया। मौके पर जांच में पाया गया कि प्रधान ने श्रमिकों के भुगतान के नाम पर रकम अपने देवर के खाते में भेजी और बाद में नकद भुगतान का दावा किया। जांच रिपोर्ट 18 नवंबर 2024 को जमा कर दी गई, जिसमें प्रधान को दोषी बताया गया।
डीएम का नोटिस, अधिकार सीज होने की स्थिति
जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम अंजनी कुमार सिंह ने ग्राम प्रधान को नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह में साक्ष्यों सहित जवाब देने के लिए कहा है। जवाब न मिलने पर प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए जाएंगे और ग्राम सभा संचालन के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई जाएगी।
एक वर्ष तक फाइल दबाए रखने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच रिपोर्ट समय पर प्राप्त होने के बावजूद पंचायत राज विभाग ने लगभग एक वर्ष तक कार्रवाई रोककर फाइल दबाए रखी। विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत का भी आरोप लगाया गया है।
प्रधान को नोटिस भेज दिया गया है। निर्धारित समय में यदि उन्होंने साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए, तो उनके वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर तीन सदस्यीय समिति गठित की जाएगी।
-डॉ. अवधेश सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी