
डिजिटल डेस्क। पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम में स्थित खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के डेरा इस्माइल खान जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां के रहीम बाजार में स्थित लगभग दो शताब्दी पुराने ऐतिहासिक रामलीला मंदिर को एक व्यावसायिक प्लाजा में बदलने के लिए ढहाने का प्रयास किया गया।
हालांकि, स्थानीय हिंदू समुदाय और नागरिक समाज (सिविल सोसाइटी) के कड़े विरोध और सजगता के चलते इस साजिश को नाकाम कर दिया गया। विरोध प्रदर्शन के बाद स्थानीय प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए इमारत को अपने नियंत्रण में लिया, जिसके बाद इवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) ने मंदिर परिसर को पूरी तरह सील कर दिया।
घटना की शुरुआत तब हुई जब रहीम बाजार स्थित मंदिर परिसर में अचानक तोड़फोड़ की गतिविधियां शुरू की गईं। डेरा सिविल सोसाइटी और व्यापारी संघ के प्रमुख सोहेल अहमद आजमी को जैसे ही इस बात की भनक लगी, वे स्थानीय नागरिकों और हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ मौके पर पहुंचे।
वहां निर्माण का काम करा रहे व्यक्ति ने दावा किया कि उसे इमारत ढहाने का ठेका मिला है। इसके विरोध में नागरिक समाज और अल्पसंख्यक समुदाय ने तत्काल बैठक बुलाकर मांग की कि संपत्ति के मालिकाना हक और व्यावसायिक निर्माण की वैधता की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, जनप्रतिनिधियों से इस मुद्दे को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में उठाने की अपील भी की गई।
उल्लेखनीय है कि ईटीपीबी (ETPB) पाकिस्तान सरकार का वह विभाग है जो 1947 में विभाजन के बाद भारत पलायन कर चुके लोगों की संपत्तियों की देखरेख करता है। रामलीला मंदिर उन 400 से अधिक ऐतिहासिक संपत्तियों में शामिल है जिन्हें ईटीपीबी द्वारा सांस्कृतिक विरासत घोषित किया गया है। ऑल पाकिस्तान हिंदू राइट्स मूवमेंट के अध्यक्ष हारून सरब डायल ने मांग की कि साल 2013 से 2026 के बीच अवैध रूप से बेची गई या कब्जाई गई सभी अल्पसंख्यक धार्मिक संपत्तियों की विस्तृत जांच होनी चाहिए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि वर्तमान प्रांतीय प्रशासन में हिंदू धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। यह क्षेत्र धार्मिक व पुरातात्विक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है, जहां 7वीं से 11वीं शताब्दी का प्रसिद्ध बिलोट शरीफ मंदिर परिसर भी मौजूद है।
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