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इबोला का हाहाकार: 20 दिनों में 204 मौतें, भारत में अभी तक नया स्ट्रेन नहीं, लेकिन दक्षिण भारत में अलर्ट

अफ्रीका महाद्वीप में जानलेवा इबोला वायरस (Ebola Virus) के अत्यधिक संक्रामक 'बुंडीबुग्यो' (Bundibugyo) स्ट्रेन के तेजी से फैलते प्रकोप ने दुनिया भर की ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 25 May 2026 03:08:34 PM (IST)Updated Date: Mon, 25 May 2026 03:08:34 PM (IST)
इबोला का हाहाकार: 20 दिनों में 204 मौतें, भारत में अभी तक नया स्ट्रेन नहीं, लेकिन दक्षिण भारत में अलर्ट
इबोला के घातक 'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन से कांगो में मची त्राहि-त्राहि।

HighLights

  1. इबोला के घातक 'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन से कांगो में मची त्राहि-त्राहि
  2. भारत में अभी तक नया स्ट्रेन नहीं, लेकिन दक्षिण भारत में अलर्ट
  3. केरल-कर्नाटक के बाद आंध्र प्रदेश के एयरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग शुरू

डिजिटल डेस्क। अफ्रीका महाद्वीप में जानलेवा इबोला वायरस (Ebola Virus) के अत्यधिक संक्रामक 'बुंडीबुग्यो' (Bundibugyo) स्ट्रेन के तेजी से फैलते प्रकोप ने दुनिया भर की चिंताओं को बढ़ा दिया है। विशेष रूप से लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (DRC) और युगांडा में बिगड़ते हालातों को देखते हुए भारत सरकार ने सोमवार (25 मई 2026) को कूटनीतिक मुस्तैदी दिखाते हुए कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान के लिए एक उच्च-स्तरीय ट्रैवल एडवाइजरी (Travel Advisory) जारी कर दी है।

केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे इन तीनों प्रभावित अफ्रीकी देशों की गैर-जरूरी (Non-Essential) यात्राओं को तत्काल प्रभाव से टाल दें।

स्वदेश लौटने वाले यात्रियों के लिए 21 दिनों का कड़ा नियम

विदेश मंत्रालय (MEA) और स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी संयुक्त विधिक गाइडलाइंस के अनुसार, इन तीनों देशों से सीधे आने वाले या वहां से होकर (Transit) भारत पहुंचने वाले यात्रियों के लिए सख्त प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं:

  • 21 दिनों की निगरानी: भारत आने के बाद सभी यात्रियों को अनिवार्य रूप से 21 दिनों तक अपनी सेहत की सेल्फ-मॉनिटरिंग करनी होगी।
  • लक्षणों की पहचान: यदि इस अवधि में बुखार, अत्यधिक कमजोरी, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, दस्त, गले में खराश या आंतरिक/बाहरी ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखते हैं, तो उन्हें तुरंत अधिकारियों को सूचित करना होगा।
  • इमिग्रेशन प्रोटोकॉल: हवाई अड्डों पर इमिग्रेशन क्लीयरेंस से पहले प्रत्येक यात्री को अनिवार्य रूप से अपनी पूरी ट्रैवल हिस्ट्री एयरपोर्ट हेल्थ ऑफिसर (APHO) के समक्ष विधिक रूप से दर्ज करानी होगी।

भारत में 'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन का कोई केस नहीं, दक्षिण भारत में अलर्ट

राहत की बात यह है कि भारत में अभी तक इस नए स्ट्रेन का कोई भी मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियातन राज्यों ने अपनी सीमाएं और हवाई अड्डे अलर्ट मोड पर डाल दिए हैं।

केरल और कर्नाटक के बाद अब आंध्र प्रदेश सरकार ने भी अपने हवाई अड्डों पर सघन निगरानी शुरू कर दी है। विशाखापत्तनम, तिरुपति और विजयवाड़ा एयरपोर्ट पर संदिग्ध यात्रियों की स्क्रीनिंग की जा रही है। लक्षण पाए जाने पर मरीजों को तुरंत क्वारंटीन करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित शहरों के बड़े सरकारी अस्पतालों में 15-15 बेड वाले विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार कर दिए गए हैं।


विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान में कुल 58,560 भारतीय मूल के लोग रह रहे हैं, जिनकी सुरक्षा पर कूटनीतिक नजर रखी जा रही है।

20 दिनों में 204 मौतें, मेडिकल इमरजेंसी

अफ्रीका के धरातल पर इबोला वायरस किस कदर तबाही मचा रहा है, इसका सांख्यिकीय और जमीनी विवरण इस प्रकार है:

संकट के मुख्य पैरामीटर्स जमीनी स्थिति और सांख्यिकी (Current Matrix - May 2026)** सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव (Economic Impact)**
संक्रमण और मृत्यु दर 5 मई 2026 को पहले अलर्ट के बाद मात्र 20 दिनों के भीतर 867 संदिग्ध मामले और 204 मौतें दर्ज हो चुकी हैं। महामारी का मुख्य केंद्र कांगो के इतुरी प्रांत की राजधानी बुनिया (Bunia) बना हुआ है, जहां स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
कालाबाजारी का संकट सैनिटाइजर, डिसइन्फेक्टेंट और मास्क की भारी किल्लत हो गई है। स्थानीय बाजारों में 2,500 कांगोली फ्रैंक (₹85) का सैनिटाइजर 4 गुना महंगा होकर 10,000 फ्रैंक (₹340) में बिक रहा है। मास्क के दाम 10 गुना तक बढ़ चुके हैं।
राजधानी को खतरा वायरस वर्तमान केंद्र से करीब 600 किलोमीटर दूर स्थित है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों को डर है कि यदि वायरस 2 करोड़ की आबादी वाली राजधानी किन्शासा (Kinshasa) पहुंच गया, तो वैश्विक तबाही मच सकती है।

दुनिया भर में सीमाएं सील, अलर्ट जारी

कांगो में पैर पसारते इस वायरस को रोकने के लिए पड़ोसी देशों और वैश्विक महाशक्तियों ने भी कड़े विधिक और सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं:

  • पड़ोसी देश: युगांडा ने कांगो सीमा पर सभी प्रकार के सार्वजनिक परिवहन पर विधिक रोक लगा दी है। रवांडा ने विदेशी यात्रियों के प्रवेश को प्रतिबंधित किया है, जबकि जाम्बिया और मलावी ने अपनी सीमाओं पर थर्मल स्क्रीनिंग अनिवार्य कर दी है।

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  • अमेरिका और चीन: संयुक्त राज्य अमेरिका ने प्रभावित अफ्रीकी देशों से आने वाली उड़ानों पर एंट्री रिस्ट्रिक्शन लागू किए हैं, जबकि चीन ने सीमा पर 6 महीने का कड़ा कस्टम्स अलर्ट जारी किया है।
  • जापान और फ्रांस: जापान ने लेवल-1 का ट्रैवल रिस्क अलर्ट जारी किया है। वहीं, फ्रांस ने हिंद महासागर में स्थित अपने मायोट (Mayotte) द्वीप पर एयरपोर्ट आइसोलेशन वार्ड्स को मजबूत कर दिया है।