
डिजिटल डेस्क: ईरान में शुक्रवार को लगातार तेरहवें दिन सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी रहे। यह देशव्यापी अशांति हाल के वर्षों में शासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। हालात की गंभीरता को देखते हुए गुरुवार को सरकार ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं और टेलीफोन लाइनें भी काट दीं, जिससे ईरान का संपर्क बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह टूट गया। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, विरोध प्रदर्शन शुरू (Iran Protests) होने के बाद से दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है।
इन प्रदर्शनों की शुरुआत तेहरान के बाजारों में बढ़ती महंगाई के खिलाफ हुई थी। हालात तब बिगड़े जब रोजमर्रा के उपयोग की चीजों की कीमतें अचानक बढ़ गईं और कई उत्पाद बाजार से गायब हो गए। सेंट्रल बैंक द्वारा एक ऐसी योजना खत्म करने के फैसले ने स्थिति को और गंभीर बना दिया, जिसके तहत कुछ आयातकों को सस्ते अमेरिकी डॉलर मिलते थे।

इस फैसले के बाद कई दुकानदारों ने कीमतें बढ़ा दीं या दुकानें बंद कर दीं। सरकार ने हर महीने लगभग 7 डॉलर की नकद सहायता देकर हालात संभालने की कोशिश की, लेकिन यह प्रयास असफल रहा।
ये विरोध प्रदर्शन 2022 के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं, जब महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद “औरत, जिंदगी, आजादी” आंदोलन हुआ था। मौजूदा आंदोलन में 100 से अधिक शहरों के लोग शामिल हुए हैं।
ईरान के पश्चिमी प्रांतों इलम और लोरेस्टान में हालात ज्यादा तनावपूर्ण हैं। इन इलाकों में जातीय विभाजन और गरीबी से नाराज भीड़ ने सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया और सुप्रीम लीडर खामेनेई के खिलाफ नारे लगाए।
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी फार्स के मुताबिक, 950 पुलिसकर्मी और 60 बासिज फोर्स के जवान घायल हुए हैं। नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स एनजीओ (IHRNGO) के अनुसार, कम से कम 45 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं, जिनमें आठ बच्चे शामिल हैं। 2,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार आंदोलन की शुरुआत बाजारियों ने की, जिन्हें आमतौर पर सरकार समर्थक माना जाता रहा है। ऐतिहासिक रूप से बाजारियों और धर्मगुरुओं के गठबंधन ने 1979 की इस्लामिक क्रांति में अहम भूमिका निभाई थी।
करेंसी में उतार-चढ़ाव से उनके व्यापार को भारी नुकसान हुआ, जिससे वे सड़कों पर उतर आए और आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया।
ईरान 1979 से एक इस्लामिक रिपब्लिक है, जहां वास्तविक सत्ता सुप्रीम लीडर के पास होती है। मसूद पेजेशकियन 2024 में राष्ट्रपति बने, लेकिन उनकी शक्तियां सीमित हैं। कड़े प्रतिबंधों और अमेरिका-इजरायल के साथ संभावित युद्ध की आशंका ने जनता की चिंता बढ़ा दी है। पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी ने खुद को सरकार के विकल्प के रूप में पेश किया है और प्रदर्शनों को समर्थन दिया है।
Dear world, ARE YOU WATCHING?
The 14th night of the Iranian uprising.⁰The 14th night of demanding freedom.⁰The 14th night of fighting the Islamic regime.
FREEDOM FOR IRAN.
— Vivid.🇮🇱 (@VividProwess) January 10, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर हिंसा हुई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि अमेरिका ईरान पर “जोरदार हमला” कर सकता है। इसके जवाब में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने ट्रंप से अपने देश की समस्याओं पर ध्यान देने को कहा और प्रदर्शनों के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया।