
डिजिटल डेस्क। ईरान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे नाजुक मोड़ पर खड़ा है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद, पिछले 46 वर्षों में अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार के सामने यह अब तक की सबसे बड़ी और असाधारण चुनौती है। 28 दिसंबर को बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और गिरती मुद्रा के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन अब 'मौलवी तंत्र' को उखाड़ फेंकने की मांग में तब्दील हो चुका है।

जैसे-जैसे प्रदर्शनकारी ईरान की सड़कों पर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं, पूरी दुनिया की नजरें तेहरान पर टिकी हैं। हाल ही में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद, नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सीधी चेतावनी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों के साथ है और अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या हुई, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। यह संकेत है कि अमेरिका एक बार फिर ईरान में 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) के प्रयासों में जुट गया है।
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विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर बहस तेज है कि क्या यह विरोध प्रदर्शन 46 साल पुराने इस्लामी गणराज्य को उखाड़ फेंकेगा? ओटावा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थॉमस जूनो का मानना है कि हालांकि शासन पहले से कहीं अधिक कमजोर है, लेकिन इसका पतन होगा या नहीं, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। वहीं, पेरिस की प्रोफेसर निकोल ग्राजेव्स्की के अनुसार, ईरान का दमनकारी सिस्टम बहुत गहरा और मजबूत है, जो आसानी से घुटने नहीं टेकने वाला।
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ईरान में विरोध की आग 28 दिसंबर को तेहरान के बाजार में हड़ताल के साथ शुरू हुई थी। देखते ही देखते यह आंदोलन राजधानी समेत देश के अन्य बड़े शहरों में फैल गया। इससे पहले 2022-23 में महसा अमीनी की मौत के बाद भी देश दहला था, लेकिन इस बार का आक्रोश सीधे 'सर्वोच्च नेता' को चुनौती दे रहा है। जवाब में ईरानी प्रशासन ने देश भर में इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी हैं और सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई कर रहे हैं, जिसमें सैकड़ों लोगों के मारे जाने की खबर है।
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1979 में अयातुल्ला खुमैनी ने शाह रजा पहलवी की राजशाही को हटाकर इस्लामी शासन स्थापित किया था। उनके बाद खामेनेई जीवनभर के लिए सर्वोच्च नेता बने। अब ईरानी जनता इस दमघोंटू व्यवस्था से आजादी चाहती है और एक 'पंथनिरपेक्ष लोकतांत्रिक शासन' की मांग कर रही है। यदि ईरान में सत्ता परिवर्तन होता है, तो यह न केवल वैश्विक ऊर्जा बाजार (तेल और गैस) को प्रभावित करेगा, बल्कि पूरी दुनिया का पॉलिटिकल मैप और मध्य-पूर्व की स्थिरता को भी बदल देगा।
वर्तमान में खामेनेई का सख्त लहजा और पुलिस की बर्बरता यह दर्शाती है कि सत्ता फिलहाल झुकने को तैयार नहीं है, लेकिन जनता का बढ़ता सैलाब भविष्य के किसी बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहा है।