
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिकी राज्य ओहायो के गवर्नर चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रत्याशी डॉ. एमी एक्टन ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। कड़े मुकाबले में उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समर्थित रिपब्लिकन उम्मीदवार व भारतीय-अमेरिकी उद्यमी विवेक रामास्वामी को पराजित किया। इस जीत के साथ 60 वर्षीय डॉ. एक्टन ओहायो की कमान संभालने वाली पहली महिला गवर्नर बन गई हैं। साथ ही, पिछले दो दशकों में यह पहला मौका है जब इस पद पर किसी डेमोक्रेटिक नेता ने जीत दर्ज की है।
पब्लिक हेल्थ विशेषज्ञ डॉ. एक्टन ने अपने अभियान को मुख्य रूप से सुलभ व किफायती स्वास्थ्य सेवाओं पर केंद्रित रखा। उन्होंने आम और कामकाजी वर्ग के मतदाताओं से सीधा संवाद साधा और अपने जीवन के संघर्षों को साझा किया। प्रचार के दौरान उन्होंने बताया कि बचपन में बेघर होने के कारण उन्हें भीषण ठंड के दिन टेंट में काटने पड़े थे। यह भावनात्मक जुड़ाव उन मतदाताओं को आकर्षित करने में सफल रहा, जो पिछले कुछ वर्षों से रिपब्लिकन पार्टी की ओर झुक गए थे।
चुनावी रणनीतिकार के तौर पर डॉ. एक्टन ने बायोटेक उद्यमी और 2024 के राष्ट्रपति पद के पूर्व दावेदार विवेक रामास्वामी की संपत्ति को बड़ा मुद्दा बनाया। उन्होंने रामास्वामी को जमीनी हकीकत और महंगाई से जूझ रही जनता की समस्याओं से बेखबर नेता के रूप में पेश किया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, रामास्वामी और उनकी समर्थक लॉबी ने इस चुनाव में 100 मिलियन डॉलर की भारी-भरकम राशि झोंकी थी। इसमें दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क द्वारा एक समर्थक पीएसी (पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) को दिया गया कम से कम 5 मिलियन डॉलर का चंदा भी शामिल था। इसके बावजूद भारी चुनावी खर्च मतदाताओं का रुख बदलने में नाकाम रहा।
चुनाव प्रचार के दौरान विवेक रामास्वामी का एक आक्रामक विज्ञापन गंभीर विवादों में घिर गया था। करीब 40 लाख डॉलर के इस विज्ञापन में डॉ. एक्टन की मां को अपनी बेटी के दावों पर सवाल उठाते हुए दिखाया गया था। प्रचार सामग्री में एक्टन के बचपन के बेहद संवेदनशील और दर्दनाक अनुभवों- जैसे उपेक्षा और उनके सौतेले पिता द्वारा किए गए कथित शोषण को राजनीतिक हथियार बनाने का प्रयास किया गया।
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इस कदम की डेमोक्रेट्स के अलावा रिपब्लिकन पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी कड़ी निंदा की। हालांकि, स्थिति को संभालने के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को रामास्वामी के पक्ष में सार्वजनिक बयान देना पड़ा, लेकिन इस तीखे व्यक्तिगत हमले का विपरीत असर पड़ा और मतदाताओं की सहानुभूति अंततः डॉ. एमी एक्टन के पक्ष में हो गई।