रूसी रॉकेट से छोड़े जा रहे अमेरिकी सेटेलाइट!
अमेरिका की सर्वोच्चता पर हैरान करने वाला सवाल, संसदीय समिति के प्रमुख मैक्केन ने पेंटागन से मांगा जवाब। ...और पढ़ें
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Publish Date: Thu, 11 Feb 2016 06:16:33 PM (IST)Updated Date: Thu, 11 Feb 2016 06:17:15 PM (IST)

वाशिंगटन। यह खबर अमेरिका की सर्वोच्चता पर सवालिया निशान लगाने वाली है। बहुत से लोगों को इस पर भरोसा करने में कठिनाई भी हो सकती है। पता चला है कि अमेरिकी उपग्रहों (सेटेलाइट) में रूसी रॉकेट इंजन लगाया जा रहा है।
अमेरिकी संसद सीनेट की सैन्य सेवा समिति के प्रमुख जॉन मैक्केन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए रक्षा विभाग पेंटागन और वायुसेना से जवाब तलब किया है। जॉन मैक्केन ने वायुसेना सचिव डेबोरा जेम्स और पेंटागन के मुख्य हथियार क्रेता फ्रैंक केंडाल को लिखे पत्रों में पूछा है कि अमेरिकी सरकार एनपीओ इनरगोमाश नाम की रूसी कंपनी के साथ सौदा क्यों बरकरार रखे हुए है?
यह रूसी कंपनी आरडी-180 रॉकेट इंजन बनाती है और उसे बेचती है। मैक्केन ने अधिकारियों से इस सौदे के कानूनी पहलुओं पर भी सवाल पूछे हैं। पूछा है कि इस कंपनी पर रोक लगाने की जगह उससे व्यापार जारी रखा गया है जबकि कुछ दिन पहले कंपनी के प्रबंधन में हुए बदलाव के बाद वह रूस के उप प्रधानमंत्री दिमित्री रोगोजिन के सीधे नियंत्रण में आ गई है।
मैक्केन ने वायुसेना के यूनाइटेड लॉंच एलायंस (यूएलए) के साथ हुए बड़े समझौते पर भी सवाल उठाए हैं। यह अमेरिका की दो बड़ी विमान बनाने वाली कंपनियों- लॉकहीड मार्टिन कॉर्पोरेशन और बोइंग कंपनी का संयुक्त उद्यम है।
जनवरी महीने में चली मामले की सुनवाई के दौरान वायुसेना सचिव जेम्स ने रूसी रॉकेट इंजन के इस्तेमाल संबंधी मामले पर अपना स्पष्टीकरण दिया था लेकिन मैक्केन यह सब लिखित चाहते हैं। उनके अनुसार इस तरह के सौदों से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके भ्रष्ट साथियों को मदद मिलती है।
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी संसद ने 2014 में क्रीमिया विवाद के बाद रूसी रॉकेट इंजन के सैन्य इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। इसके बाद वायुसेना और अन्य संबंधित विभागों ने संसद से यह प्रतिबंध हटाने की गुजारिश की थी क्योंकि उन्हें कुछ रॉकेटों की तत्काल जरूरत थी।
अमेरिका को ये रॉकेट रूसी कंपनी से यूएलए के जरिये मिलते हैं। मैक्केन से सारे बिंदुओं पर 22 फरवरी तक जवाब मांगा है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका इस सौदे पर सन 2006 से हर साल करीब एक अरब डॉलर (करीब 67 अरब रुपये) खर्च करता रहा है।