
बिजनेस डेस्क। भारत अपनी आर्थिक प्रगति को मापने के तरीके में एक क्रांतिकारी बदलाव करने जा रहा है। अब देश की खुशहाली और तरक्की का आकलन सिर्फ GDP (सकल घरेलू उत्पाद) के आधार पर नहीं, बल्कि NDP (शुद्ध घरेलू उत्पाद) के नए पैमाने से किया जाएगा। मोदी सरकार अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाते हुए विकास की ज्यादा सटीक और 'ईमानदार' तस्वीर पेश करने की तैयारी में है।
सालों से हम 'GDP ग्रोथ' शब्द सुनते आ रहे हैं। GDP का मतलब है एक साल में देश की सीमाओं के भीतर उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल बाजार मूल्य। यह बताता है कि हमने कुल कितनी 'कमाई' की।
लेकिन, NDP (Net Domestic Product) इससे एक कदम आगे की बात है। उत्पादन की प्रक्रिया में मशीनें घिसती हैं, फैक्ट्रियां पुरानी होती हैं और प्राकृतिक संसाधनों (कोयला, तेल, खनिज) का क्षरण होता है। GDP इन नुकसानों को नहीं गिनता, जबकि NDP कुल उत्पादन में से इस 'घिसावट' (Depreciation) को घटा देता है।
भारत वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के सिस्टम ऑफ नेशनल अकाउंट्स (SNA) के साथ अपने आंकड़ों का तालमेल बिठाना चाहता है। इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण हैं:
सिर्फ मापने का तरीका ही नहीं, बल्कि गणना का आधार भी बदलने वाला है। वर्तमान में GDP की गणना 2011-12 को आधार वर्ष मानकर की जाती है। अब सरकार इसे बदलकर 2022-23 करने जा रही है।
फायदा: इससे आज की डिजिटल इकोनॉमी, स्टार्टअप्स और आधुनिक सेवाओं का सही मूल्य आंकड़ों में शामिल हो सकेगा। नई GDP सीरीज 27 फरवरी को जारी होने की उम्मीद है।
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इस बदलाव का आपकी सैलरी या टैक्स पर कोई सीधा और तत्काल असर नहीं होगा। हालांकि, इसका दूरगामी प्रभाव सरकारी नीतियों पर पड़ेगा।