
डिजिटल डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ में 500% तक की बढ़ोतरी की धमकी (Trump 500 percent Tariff Threat India) के बीच भारत ने अपनी वैश्विक निर्यात रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि भारत अब अमेरिकी निर्भरता कम करने के लिए यूरोपीय बाजारों में अपनी पैठ तेजी से मजबूत कर रहा है। स्पेन, जर्मनी, बेल्जियम और पोलैंड जैसे देश भारतीय वस्तुओं के लिए प्रमुख गंतव्य बनकर उभरे हैं।
निर्यात आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष (अप्रैल-नवंबर) के दौरान स्पेन भारतीय उत्पादों के लिए सबसे तेजी से बढ़ता बाजार साबित हुआ है। स्पेन को होने वाले निर्यात में 56% की भारी उछाल दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष के 3 अरब डॉलर से बढ़कर 4.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसके साथ ही भारत के कुल निर्यात में स्पेन की हिस्सेदारी बढ़कर 2.4% हो गई है।
यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, जर्मनी में भी भारतीय वस्तुओं की मांग स्थिर बनी हुई है। आठ महीनों के दौरान जर्मनी को होने वाला निर्यात 9.3% बढ़कर 7.5 अरब डॉलर हो गया है। वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, जर्मनी भारतीय उत्पादों के लिए एक विश्वसनीय और स्थिर मांग केंद्र बना हुआ है।
भारत का निर्यात विविधीकरण केवल बड़े देशों तक सीमित नहीं है। अप्रैल-नवंबर 2025-26 के दौरान बेल्जियम को होने वाला निर्यात 4.2 अरब डॉलर से बढ़कर 4.4 अरब डॉलर हो गया है। वहीं, पोलैंड को होने वाले निर्यात में भी 7.6% की वृद्धि देखी गई है, जो अब 1.82 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है।
मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि ये रुझान भारत की 'बाजार विविधीकरण' रणनीति की सफलता को दर्शाते हैं। स्पेन जैसे नए बाजारों में तेजी और जर्मनी जैसे पुराने बाजारों में स्थिरता यह सुनिश्चित करती है कि यदि अमेरिका जैसे देश टैरिफ संबंधी कड़े कदम उठाते भी हैं, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर उसका प्रभाव सीमित रहे। भारत अब केवल एक बाजार के भरोसे रहने के बजाय अपने वैश्विक व्यापार को संतुलित और सुरक्षित बना रहा है।
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