बिजनेस डेस्क। केंद्र सरकार हर साल बजट पेश करती है, जिसमें यह तय होता है कि देश के विकास और जनकल्याण पर कितना खर्च होगा और इसके लिए पैसा किन स्रोतों से आएगा। बजट सरकार की आमदनी और खर्च दोनों की पूरी तस्वीर पेश करता है। चलिए आपको बताते हैं कि आखिर सरकार के पास इतना पैसा कहां से आता है और सरकार इनको किससे- किससे कितने हिस्सेदारी में जुटाती है।
सरकार को पैसा कहां से मिलता है?
1. टैक्स रेवेन्यू
सरकार की आय का सबसे बड़ा हिस्सा टैक्स से आता है।
टैक्स दो तरह के होते हैं- डायरेक्ट टैक्स और इनडायरेक्ट टैक्स।
डायरेक्ट टैक्स में इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स शामिल हैं।
इनडायरेक्ट टैक्स में जीएसटी, पेट्रोल-डीजल और शराब पर लगने वाला उत्पाद शुल्क आता है।
टैक्स के जरिए सरकार रेवेन्यू जुटाने के साथ आर्थिक असमानता कम करने की कोशिश भी करती है।
2. नॉन-टैक्स रेवेन्यू
टैक्स के अलावा सरकार को सेवाओं की फीस, जुर्माने और लाइसेंस शुल्क से आय होती है।
रेलवे, डाक विभाग, पब्लिक सेक्टर बैंक और अन्य सरकारी कंपनियां सरकार को रेवेन्यू देती हैं।
कोयला, खनिज और स्पेक्ट्रम जैसी प्राकृतिक संपत्तियों की नीलामी से भी सरकार को पैसा मिलता है।
यह आय टैक्स से कम होती है, लेकिन बजट में इसका योगदान अहम रहता है।
3. उधारी और कर्ज
जब सरकार की आय खर्चों से कम पड़ती है, तो वह उधार लेती है।
सरकारी बॉन्ड के जरिए बैंक, बीमा कंपनियों और आम लोगों से कर्ज लिया जाता है।
छोटी बचत योजनाएं भी सरकार के लिए फंड जुटाने का जरिया हैं।
जरूरत पड़ने पर सरकार विदेशी संस्थाओं और सरकारों से भी कर्ज लेती है।
4. विनिवेश और अन्य स्रोत
सरकार कई बार सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर पैसा जुटाती है, जिसे विनिवेश कहते हैं। यह फंड विकास योजनाओं और बजट घाटा कम करने में इस्तेमाल किया जाता है।
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