
नईदुनिया न्यूज, वाड्रफनगर। बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर जनपद के ग्राम शारदापुर में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी भवन का छज्जा गिरने से स्कूली छात्र की मौत पर प्रधानपाठक को निलंबित कर दिया गया है। विद्यालय में पदस्थ तीन अन्य शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। घटिया निर्माण के आरोप पर निर्माण एजेंसी के विरुद्ध अपराध पंजीकृत किया गया है। निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत है। इस आधार पर सरपंच-सचिव जांच के दायरे में हैं। कलेक्टर राजेन्द्र कटारा ने पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच तथा जिम्मेदारी तय कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
शारदापुर में निर्माणाधीन आंगनवाड़ी भवन के छज्जे के गिरने से मासूम आलोक देवांगन की मौत के बाद से गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है।घटना के दूसरे दिन प्रशासन की समझाइश के उपरांत स्वजन ने कक्षा छठवीं में पढ़ने वाले मासूम आलोक का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में ग्रामीणों के साथ प्रशासनिक अमला भी मौजूद रहा। नम आंखों से पूरे गांव ने मासूम को अंतिम विदाई दी।सुबह से ही इस घटना को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश था।
वे इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। दोपहर तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया गया था। प्रशासनिक टीम ने समझाइश दी कि दोषियों के विरुद्ध अपराध पंजीकृत कर लिया गया है। जांच शुरू कर दी गई है।हालांकि स्वजन और ग्रामीण प्रशासनिक कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। स्वजन का कहना है कि जिस लापरवाही के कारण मासूम की जान गई, उन सभी के विरुद्ध प्राथमिकी होनी चाहिए,ताकि भविष्य में ऐसी घटना न हो।
शारदापुर के खुटहनपारा स्थित पूर्व माध्यमिक शाला में आलोक कुमार देवांगन कक्षा छठवीं में पढ़ता था। गुरुवार को भोजन अवकाश के समय आलोक देवांगन निर्माणाधीन आंगनवाड़ी भवन के पास पहुंच गया था। इसी दौरान भवन का छज्जा अचानक भरभराकर गिर पड़ा था जिसके नीचे दबने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
स्कूली छात्र की मौत की घटना को शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया है। संयुक्त संचालक शिक्षा संजय गुप्ता ने विद्यालय की प्रधान पाठक ममता गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर सतर्कता पूर्वक तरीके से बच्चों की निगरानी नहीं करने तथा दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही और उदासीनता बरतने का आरोप है। इस विद्यालय में पदस्थ तीन अन्य शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
घटना के बाद यह दलील दी गई कि विद्यार्थी शौच के लिए गया था,इस पर भी स्वजन और ग्रामीणों ने सवाल उठाए। स्वजन का कहना था कि विद्यालय परिसर में ही पांच शौचालय है लेकिन एक भी शौचालय को खोल कर नहीं रखा गया था। सभी में ताला लगा हुआ था। यदि शौचालय उपयोग लायक था तो उसे खोलकर रखना चाहिए था ताकि बच्चे को निर्माणाधीन भवन के पास नहीं जाना पड़ता।घटना के दूसरे दिन सभी शौचालयों की साफ-सफाई कर खोल दिया गया था।
प्रकरण में लापरवाहीपूर्वक घटिया निर्माण से बच्चे की मौत के आरोप पर निर्माण एजेंसी के विरुद्ध धारा 106(1) के तहत प्राथमिकी की गई है। इसमें किसी का नाम नहीं है। चूंकि निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत था इसलिए सरपंच-सचिव पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।निर्माण एजेंसियों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा मूल्यांकन एवं भुगतान के नाम पर भारी कमीशन की मांग की जाती हैं जिस कारण हम मानक के अनुरूप निर्माण कार्य में सामग्री का उपयोग नहीं कर पाते हैं, जिस कारण गुणवत्ता की अनदेखी हो जाती है।त्रिकुंडा थाने की पुलिस प्रकरण की जांच में जुटी है।
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भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) लापरवाही से मृत्यु कारित करना से संबंधित है, जो किसी व्यक्ति की जल्दबाजी या लापरवाही भरे काम से हुई मौत के लिए दंड का प्रावधान करती है, जिसमें पांच साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है, और यह भारतीय दंड संहिता की धारा 304 ए का स्थान लेती है, जिसमें हिट-एंड-रन के मामलों और चिकित्सा पेशेवरों द्वारा लापरवाही के लिए अलग-अलग दंड हैं।