
नईदुनिया प्रतिनिधि, बीजापुर: बीजापुर जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र में पिछले दो दिन से जारी सर्च ऑपरेशन के दौरान अब तक चार महिला कैडरों समेत छह माओवादी मारे गए हैं। इनमें से चार की पहचान कर ली गई है, जो कि 20 लाख रुपये के इनामी थे। इस कार्रवाई से माओवादियों की नेशनल पार्क एरिया कमेटी को गहरा झटका लगा है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मुठभेड़ में मारे गए माओवादियों में 8 लाख रुपये का इनामी डीवीसीएम (डिविजनल कमेटी सदस्य) दिलीप बेड़जा और पांच-पांच लाख रुपये के इनामी दो एसीएम (एरिया कमेटी सदस्य) माड़वी कोसा और लक्खी मड़काम शामिल हैं। इसके अलावा दो लाख रुपये की इनामी पार्टी मेंबर (पीएम) राधा मेट्टा की भी पहचान हुई है। शेष दो माओवादियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉ. जितेन्द्र यादव ने बताया कि उत्तर-पश्चिमी बीजापुर के जंगल–पहाड़ी क्षेत्र में नेशनल पार्क एरिया कमेटी के डीवीसीएम दिलीप बेड़जा और अन्य सशस्त्र माओवादियों की उपस्थिति की पक्की सूचना के आधार पर डीआरजी, कोबरा और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने सर्च आपरेशन शुरू किया था। शनिवार की सुबह से ही माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच रुक-रुक कर फायरिंग होती रही।
उसी दिन दोपहर और शाम को चार माओवादी कैडरों के शव बरामद किए गए, जबकि रविवार को सर्चिंग के दौरान दो और माओवादी मारे गए। फिलहाल आसपास के क्षेत्रों में सघन सर्चिंग अभियान लगातार जारी है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि डीवीसीएम और दो एसीएम के मारे जाने से नेशनल पार्क एरिया कमेटी का नेतृत्व तंत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों पर असर पड़ेगा।
मुठभेड़ स्थल से एके-47, इंसास, कार्बाइन और 303 राइफल सहित कुल छह ग्रेडेड हथियार बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि ये सभी हथियार माओवादी कैडरों द्वारा सुरक्षा बलों पर हमले के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे।
यह भी पढ़ें- बीजापुर में माओवादियों के लगाए प्रेशर IED की चपेट में आकर एक 20 साल के युवक मौत, धमाके में दोनों पैर क्षतिग्रस्त हुए
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक माओवादियों के समूल सफाये का लक्ष्य तय किया है। दो साल पहले तक असंभव दिखने वाला यह लक्ष्य अब आसान होता दिखाई दे रहा है। इस दौरान प्रदेश में हुई मुठभेड़ों में माओवादी प्रमुख बसव राजू, हिड़मा, गुड्सा उसेंडी, कोसा दादा समेत 500 से अधिक माआेवादी मारे गए अौर केंद्रीय वैचारिक प्रमुख भूपति, रुपेश, सुजाता, चंद्रन्ना जैसे शीर्ष नेताओं समेत 2500 से अधिक माओवादी हथियार का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौट आए। इससे छत्तीसगढ़ में माओवादियों का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह ढह चुका है। अब एकमात्र राज्य स्तरीय माओवादी पापाराव समेत गिनती के माओवादी ही बचे हैं।
सुरक्षा बल क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और जनकल्याण सुनिश्चित करने के लिए पूर्ण निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। अभी भी समय है कि माओवादी मुख्यधारा में लौटें, वरना सुरक्षा बल के जवान उन्हें इसी तरह सबक सीखाते रहेंगे।
-सुंदरराज पट्टिलिंगम, पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज