
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। अर्णब चक्रवात का प्रभाव कमजोर पड़ने से बिलासपुर में बारिश का जोर घटने लगा है। हालांकि, दो दिनों की लगातार बारिश ने जनजीवन की रफ्तार थाम दी। गुरुवार को शहर में बादल छाए रहे और जबरदस्त झड़ी का दौर चलता रहा। लोग घर, आफिस और दुकानों में दुबके रह गए। बाजारों में चहल-पहल कम रही। मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात का अवशेष निम्न दबाव के क्षेत्र में बदल रहा है।
चक्रवात के समुद्र तट से टकराने के बाद इसकी तीव्रता घटने लगी। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे लगे दक्षिण ओडिशा के ऊपर बना अवदाब उत्तर दिशा में बढ़ रहा है। इसके आगे कमजोर होकर उत्तरी छत्तीसगढ़ और उससे लगे उत्तर-पश्चिमी ओडिशा के ऊपर स्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की संभावना है। इससे बारिश का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है।
बिलासपुर में गुरुवार को अधिकतम तापमान 22.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 7.8 डिग्री कम है। न्यूनतम तापमान 19.8 डिग्री रहा। लगातार बादल छाए रहने और बारिश के कारण दिन में भी ठंडक महसूस हुई। जरूरी काम से निकले लोगों को परेशानी हुई, जबकि बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही कम रही।
जिले में तहसीलवार कुल 281.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। बेलगहना में सर्वाधिक 35.4 मिमी और सीपत में सबसे कम 16 मिमी बारिश हुई। एक जून से अब तक जिले में कुल 13,233.2 मिमी तहसीलवार संचयी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने अगले दिन अनेक स्थानों पर बारिश की संभावना जताई है।
दक्षिण तटीय रेलवे के विशाखापत्तनम मंडल में इच्छापुरम-झाडुपुडी स्टेशनों के बीच रेलवे ट्रैक पर जलभराव होने के कारण रेल परिचालन प्रभावित हुआ है। इसके चलते 30 अक्टूबर को बिलासपुर और टाटानगर से रवाना होने वाली बिलासपुर-टाटानगर-बिलासपुर एक्सप्रेस रद रहेगी।
दक्षिण पूर्व रेलवे से प्राप्त जानकारी के अनुसार 18114 बिलासपुर-टाटानगर एक्सप्रेस और 18113 टाटानगर-बिलासपुर एक्सप्रेस का परिचालन इस तिथि को नहीं होगा। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से यात्रा शुरू करने से पहले ट्रेन की स्थिति की जानकारी लेने की अपील की है।
मौसम विशेषज्ञ अब्दुल सिराज खान की मानें तो अर्णब चक्रवात का प्रभाव घटने के बाद भी मौसम पूरी तरह साफ होने की संभावना नहीं है। अंडमान सागर के आसपास निम्न दबाव का नया क्षेत्र बनने पर दो नवंबर को फिर बारिश हो सकती है।
हालांकि, इसकी तीव्रता और बिलासपुर पर प्रभाव को लेकर मौसम विभाग के आगामी पूर्वानुमान पर नजर रखना जरूरी होगा। फिलहाल प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में गरज-चमक के साथ वज्रपात और कुछ स्थानों पर तेज हवा चलने की संभावना जताई गई है।
अलर्ट पर प्रशासन, टल गई संकट
चक्रवात का असर कम रहा, लेकिन प्रशासन की सतर्कता ने लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिया। मौसम विभाग के अलर्ट के बाद कलेक्टर के निर्देश पर बिजली, स्वास्थ्य, नगर निगम और राहत एवं बचाव दलों को सतर्क रखा गया। संभावित जलभराव, बिजली आपूर्ति में व्यवधान और आपात स्थितियों से निपटने की तैयारियां की गईं।
स्कूलों में अवकाश का निर्णय भी एहतियात के लिहाज से अहम रहा। दिनभर बारिश की झड़ी लगी रही और ठंडी हवाएं चलती रहीं। ऐसे मौसम में बच्चों को स्कूल आने-जाने की परेशानी और सर्दी-जुकाम जैसी मौसमी समस्याओं से बचाने के लिहाज से यह फैसला उचित साबित हुआ।
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