सक्ती व खरसिया सेक्शन पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग, अब बढ़ेगी ट्रेनों की क्षमता
Indian Railway: रेलखंड में 32 नए स्वचालित सिग्नल लगाए गए हैं और पूरी प्रणाली को आधुनिक इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग से जोड़ा गया है।
Publish Date: Fri, 06 Nov 2026 10:01:13 AM (IST)Updated Date: Fri, 06 Nov 2026 10:11:59 AM (IST)
पूरी प्रणाली को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से जोड़ा गया है। - फाइल फोटोHighLights
- कंप्यूटर आधारित इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग के माध्यम से सिग्नलों का संचालन
- यह पारंपरिक प्रणाली की तुलना में अधिक तेज़, विश्वसनीय एवं सुरक्षित है
- मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर के 180 डिटेक्शन पाइंट लगाए गए
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने सिग्नलिंग प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। बिलासपुर रेल मंडल अंतर्गत हावड़ा–मुंबई मुख्य रेलमार्ग के बिलासपुर–झारसुगुड़ा खंड पर स्थित सक्ती– झाराडीह – खरसिया खंड में स्वचालित सिग्नलिंग (ऑटोमैटिक सिग्नलिंग) प्रणाली को सफलतापूर्वक प्रारंभ किया गया।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे अपने यात्रियों व ग्राहकों को सुरक्षित, समयबद्ध एवं सुविधाजनक रेल सेवा उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। चार लाइनों वाले इस खंड की लंबाई 16 रूट किलोमीटर है, जो 32 किलोमीटर दोहरी लाइन के समतुल्य है।
इस कार्य के अंतर्गत रेलखंड में 32 नए स्वचालित सिग्नल लगाए गए हैं और पूरी प्रणाली को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से जोड़ा गया है। यह उपलब्धि खंड में सिग्नलिंग अवसंरचना के आधुनिकीकरण तथा परिचालन दक्षता एवं संरक्षा में वृद्धि की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
जानिए प्रमुख विशेषताएं
- इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग आधारित स्वचालित सिग्नलिंग : कंप्यूटर आधारित इलेक्ट्रानिक इंटरलॉकिंग के माध्यम से सिग्नलों का संचालन, जो पारंपरिक प्रणाली की तुलना में अधिक तेज़, विश्वसनीय एवं सुरक्षित है।
- 180 डिटेक्शन पाइंट : मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर के 180 डिटेक्शन पाइंट लगाए गए हैं, जो पटरी पर ट्रेन की उपस्थिति की सटीक जानकारी देते हैं।
- 32 नए स्वचालित सिग्नल : खंड में 32 नए सिग्नल लगाए गए हैं, जिनसे खंड में ट्रेनों का परिचालन अधिक सुगम होगा।
- निर्बाध बिजली आपूर्ति : आटो हट में एकीकृत विद्युत आपूर्ति प्रणाली लगाई गई है, ताकि सिग्नल हर समय सक्रिय रहें।
- आधुनिक अर्थिंग व्यवस्था : आरडीएसओ के नवीनतम तकनीकी परामर्श नोट के अनुसार अर्थिंग की व्यवस्था की गई है, जिससे उपकरण आकाशीय बिजली एवं विद्युत व्यवधानों से सुरक्षित रहें।
- केबलों की निरंतर निगरानी : सिग्नलिंग एवं क्वाड केबलों के लिए अर्थ लीकेज डिटेक्टर (ELD) लगाए गए हैं।
- डेटालागर, फ्यूज चेंजओवर एवं फायर अलार्म : नया डेटालागर, स्वचालित फ्यूज चेंजओवर प्रणाली तथा फायर अलार्म प्रणाली लगाई गई है, जिससे प्रणाली की निगरानी, त्वरित रखरखाव और उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
स्वचालित सिग्नलिंग के लाभ
- अधिक ट्रेनों का परिचालन : खंड की लाइन क्षमता बढ़ेगी, जिससे अधिक ट्रेनों का परिचालन संभव होगा और नई ट्रेनों के लिए मार्ग खुलेंगे।
- बेहतर समयपालन : ट्रेनों के अनावश्यक ठहराव में कमी आएगी और ट्रेनें अधिक समय पर चलेंगी।
- बढ़ी हुई संरक्षा : आधुनिक इलेक्ट्रानिक प्रणाली से रेल परिचालन की संरक्षा और अधिक सुदृढ़ होगी।
- माल परिवहन को गति : कोयला, इस्पात, सीमेंट एवं बिजली उद्योगों से जुड़े इस व्यस्त मार्ग पर मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक सुगम होगी।
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