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धान छोड़ रागी, कोदो-कुटकी और गेंदे की खेती से संवर रही किसानों की तकदीर

Chhattisgarh Farming: कोदो-कुटकी जैसी पोषक फसलों, फूलों और आधुनिक सब्जियों की खेती किसानों के लिए मुनाफे के नए द्वार खोल रही है।

By Atul VasingEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Thu, 05 Nov 2026 10:00:01 AM (IST)Updated Date: Thu, 05 Nov 2026 10:01:28 AM (IST)
धान छोड़ रागी, कोदो-कुटकी और गेंदे की खेती से संवर रही किसानों की तकदीर
गेंदें की खेती का अवलोकन करते जिले के प्रभारी सचिव व कलेक्टरl

HighLights

  1. धान छोड़ रागी, कोदो-कुटकी और गेंदे की खेती से संवर रही किसानों की तकदीर
  2. अपर मुख्य सचिव ने खेतों में पहुंचकर परखी फसलें, किसानों से किया सीधा संवाद
  3. पारंपरिक खेती से हटकर फसल विविधीकरण की राह पर आगे बढ़ रहे अन्नदाता

बिलासपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के अन्नदाता अब लीक से हटकर कुछ नया कर रहे हैं। परंपरागत धान की खेती की परिपाटी को पीछे छोड़ते हुए जिले के किसान अब 'फसल विविधीकरण' के नए आयाम गढ़ रहे हैं। कहीं खेतों में रागी और कोदो-कुटकी की बालियां लहलहा रही हैं, तो कहीं गेंदे के फूलों की महक और सब्जियों की बंपर पैदावार किसानों की आमदनी में चार चांद लगा रही है।

अपर मुख्य सचिव तथा बिलासपुर जिले के प्रभारी सचिव मनोज पिंगुआ ने बुधवार को जिले के विभिन्न ग्रामीण अंचलों का दौरा कर किसानों के इन सफल प्रयोगों का खुद जायजा लिया। खेतों की मेड़ तक पहुंचकर उन्होंने किसानों से खेती की लागत, कुल उत्पादन, फसल तैयार होने के समय और मुनाफे के संबंध में लंबी बातचीत की। इस दौरान कलेक्टर संजय अग्रवाल, जिला पंचायत के सीईओ संदीप अग्रवाल समेत कृषि और उद्यानिकी विभाग के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे।


डॉ. पल्लवी गिरी की अनूठी पहल: एक-एक हेक्टेयर में लहलहाई लघु धान्य फसलें

कोटा ब्लाक के ग्राम भेलवा टिकरा की रहने वाली डॉ. पल्लवी गिरी ने इस सीजन धान की पारंपरिक खेती से इतर एक साहसिक और अनुकरणीय कदम उठाया है। उन्होंने पहली बार धान के बदले एक-एक हेक्टेयर के रकबे में पौष्टिक लघु धान्य फसलों में रागी, कोदो और कुटकी की बंपर खेती की है।

अपर मुख्य सचिव श्री मनोज पिंगुआ ने जब उनके खेत में पहुंचकर इन लहलहाती फसलों को देखा तो वे इस नवाचार से बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने डॉ. गिरी से बीज की उपलब्धता, फसल की अवधि और आने वाले खर्च पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने मौके पर मौजूद कृषि विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि क्षेत्र के अन्य किसानों को भी इस तरह की वैकल्पिक और कम पानी में तैयार होने वाली फसलों के लिए प्रेरित किया जाए, जिससे किसानों को फसल विविधीकरण का ठोस लाभ मिल सके।

गेंदे की महक और अंतरवर्तीय खेती से चमक उठी किस्मत

इसके बाद अपर मुख्य सचिव का काफिला कोटा विकासखंड के ही ग्राम सिलदहा पहुंचा, जहां प्रगतिशील किसान संतोष शुक्ला के खेतों में खिले गेंदे के फूलों ने सबका मन मोह लिया। फूलों की क्यारियों के बीच पहुंचकर उन्होंने किसान से बाजार भाव और मुनाफे पर चर्चा की। किसान संतोष शुक्ला ने बताया कि वे करीब सवा एकड़ जमीन पर गेंदे के फूलों की खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें सीजन में 8 से 10 टन तक का उत्पादन मिल जाता है। फूलों की इस खेती से मिलने वाले शानदार आर्थिक रिटर्न को देख उन्होंने उद्यानिकी फसलों के दायरे को और बढ़ाने पर जोर दिया।

नवाचारों को मिले बढ़ावा : पिंगुआ

किसानों के इन सफल प्रयासों से अभिभूत अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने कहा कि अन्नदाताओं की आर्थिक स्थिति को और सुदृढ़ करने के लिए अब परंपरागत खेती के दायरे से बाहर निकलना होगा। फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि पद्धतियां ही भविष्य की जरूरत हैं। कोदो-कुटकी जैसी पोषक फसलों, फूलों और आधुनिक सब्जियों की खेती किसानों के लिए मुनाफे के नए द्वार खोल रही है।

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उन्होंने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि वे मैदानी स्तर पर किसानों तक पहुंचें। उन्हें उन्नत किस्म के बीज, आधुनिक तकनीकी मार्गदर्शन और शासन की तमाम कल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ समय पर दिलाएं, ताकि जिले में कृषि के क्षेत्र में हो रहे ऐसे नवाचारों को एक नई गति मिल सके।

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