
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। एक नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य बना, तो विकास के साथ शिक्षा के नए अवसरों की उम्मीदें भी जुड़ी थीं। 26 साल की यात्रा में बिलासपुर ने इन उम्मीदों को आकार देने की दिशा में लंबा सफर तय किया है। विश्वविद्यालयों के विस्तार, आधुनिक प्रयोगशालाओं, छात्रावासों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विकसित हो रहे एजुकेशन हब ने शहर को शिक्षा के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की नींव मजबूत की है।
गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, पं. सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय और अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में नए भवनों और शैक्षणिक सुविधाओं के विकास की योजनाएं इस बदलाव की तस्वीर पेश करती हैं। सीयू में 390.58 करोड़ रुपए, ओपन यूनिवर्सिटी में 34.57 करोड़ रुपए और अटल यूनिवर्सिटी में 8.45 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों का उल्लेख पिछली परियोजना रिपोर्टों में किया गया था।
इन निवेशों का उद्देश्य पढ़ाई, शोध, डिजिटल शिक्षा और विद्यार्थियों की आवासीय जरूरतों को बेहतर बनाना है। केंद्रीय विवि में 26.07 करोड़ रुपए का हाईटेक ऑनलाइन परीक्षा एवं प्रशिक्षण केंद्र, 1,000 कंप्यूटर सेटअप, छात्रावास और विभिन्न विभागों के भवनों की योजनाएं उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में अहम कदम हैं। वहीं, मधुबन में अरपा किनारे 13.10 एकड़ में प्रस्तावित एजुकेशन हब बिलासपुर के सपने को नया आयाम देता है।
करीब 120 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना में 500 सीट का नालंदा परिसर, तीन शैक्षणिक ब्लाक और 174 आवासीय इकाइयों की परिकल्पना की गई है। यहां सीजीपीएससी, यूपीएससी, नीट, जेईई, बैंकिंग और एसएससी की तैयारी के लिए अध्ययन, प्रशिक्षण और आवास की सुविधाएं एक परिसर में जुटाने की योजना है।
सिम्स में डॉक्टर, इंजीनियरिंग कॉलेजों में इंजीनियर, एग्रीकल्चर कॉलेज में कृषि वैज्ञानिक और पाणिनी शोध संस्थान में संस्कृतविद तैयार हो रहे हैं। भातखंडे संगीत विद्यालय के विद्यार्थी संगीत में पहचान बना रहे हैं। केंद्रीय विवि में देशभर से विद्यार्थी आते हैं, जबकि मुक्त विवि में नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच पढ़ने वालों को अवसर देती है। डॉ. सीवी रामन यूनिवर्सिटी और महर्षी यूनिवर्सिटी सहित तकनीकी संस्थान भी इस शैक्षणिक विस्तार में योगदान दे रहे हैं।
बिलासपुर की शैक्षणिक पहचान केवल विश्वविद्यालयों की इमारतों तक सीमित नहीं है। यहां उच्च शिक्षा, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, कृषि, संस्कृत और संगीत जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में पढ़ाई के अवसर उपलब्ध हैं। सीयू में देश के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थी पहुंचते हैं।
पं. सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी उन लोगों के लिए रास्ता खोलती है, जो नौकरी या पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ शिक्षा जारी रखना चाहते हैं। यह विविधता शहर को अलग-अलग पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी केंद्र बनाती है।
मधुबन में प्रस्तावित एजुकेशन हब का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों की रोजमर्रा की मुश्किलें कम करना है। 13.10 एकड़ में विकसित होने वाली इस परियोजना में 500 सीट का नालंदा परिसर, तीन शैक्षणिक ब्लाक और 174 आवासीय इकाइयां शामिल हैं।
लाइब्रेरी, वाचन कक्ष, डिजिटल अध्ययन, प्रशिक्षण और कौशल विकास की सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराने की परिकल्पना है। इससे दूसरे शहरों, कस्बों और गांवों से आने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई और रहने के लिए अलग-अलग स्थान तलाशने की जरूरत घट सकती है।
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बिलासपुर की शिक्षा व्यवस्था का योगदान कक्षाओं से निकलकर समाज और देश तक पहुंचता है। सिम्स के विद्यार्थी चिकित्सा क्षेत्र में, इंजीनियरिंग कालेजों के छात्र तकनीकी क्षेत्र में और एग्रीकल्चर कालेज के विद्यार्थी कृषि अनुसंधान में आगे बढ़ने की तैयारी करते हैं।
कृषि संस्थान नई फसल किस्मों पर शोध और किसानों के प्रशिक्षण से भी जुड़े हैं। पाणिनी शोध संस्थान में विदेशी विद्यार्थियों का संस्कृत अध्ययन के लिए पहुंचना शहर की अकादमिक विविधता को दर्शाता है। इस तरह शिक्षा यहां रोजगार, शोध, संस्कृति और सामाजिक विकास से जुड़ती है।
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