
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पाटन विधानसभा चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल ने अपना बयान दर्ज कराया। इसके बाद भूपेश बघेल की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने उनका प्रतिपरीक्षण किया।
सुनवाई के दौरान चुनाव याचिका के साथ साक्ष्य के रूप में जमा सीलबंद मोबाइल फोन को भी कोर्ट की अनुमति से चार्ज किया गया। करीब एक घंटे 15 मिनट तक चार्जिंग के बाद मोबाइल की बैटरी 13 प्रतिशत हुई। इसके बाद उसे दोबारा सीलबंद कर दिया गया। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर 2026 की तारीख तय की है।
5 नवंबर 2026 को जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। विजय बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता टीके झा और अधिवक्ता अमन ताम्रकार उपस्थित रहे। वहीं भूपेश बघेल की ओर से अधिवक्ता मयंक जैन, नवलेन्दु कुमार, हर्षवर्धन परगनिहा, मनुभा शंकर और अभिषेक पांडेय ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान विजय बघेल का बयान दर्ज किया गया और भूपेश बघेल की ओर से उनका प्रतिपरीक्षण किया गया। चुनाव याचिका से जुड़े तथ्यों पर सवाल-जवाब हुए। अगली सुनवाई में प्रतिपरीक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से आवेदन क्रमांक 9/2026 पेश किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता टीके झा ने बताया कि चुनाव याचिका के साथ 17 जनवरी 2024 को मोबाइल फोन साक्ष्य के रूप में आर्टिकल ए-1 के तहत सीलबंद लिफाफे में जमा किया गया था। लंबे समय तक बंद रहने के कारण मोबाइल की बैटरी डिस्चार्ज हो सकती है। इसलिए उसे अदालत में सभी पक्षों की मौजूदगी में चार्ज करने की अनुमति मांगी गई। भूपेश बघेल की ओर से इस पर कोई आपत्ति नहीं की गई।
कोर्ट ने आवेदन स्वीकार करते हुए मोबाइल को सीलबंद लिफाफे से निकलवाकर चार्ज करने की अनुमति दी। दोपहर 3:15 से शाम 4:30 बजे तक मोबाइल चार्जिंग केबल से जुड़ा रहा। इस दौरान कोर्ट के बेंच रीडर और तकनीकी कर्मचारी कृष्णा निषाद की निगरानी में मोबाइल 13 प्रतिशत तक चार्ज हुआ। इसके बाद मोबाइल को बंद कर दोबारा सीलबंद किया गया। सील पर विजय बघेल, उनके अधिवक्ता और भूपेश बघेल के अधिवक्ता ने हस्ताक्षर किए।
दुर्ग सांसद विजय बघेल ने वर्ष 2024 में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ चुनाव याचिका दायर की है। इसमें पाटन विधानसभा चुनाव के दौरान आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। याचिका के अनुसार मतदान से पहले प्रचार बंद होने की निर्धारित अवधि में भूपेश बघेल ने अपने समर्थकों के साथ पाटन क्षेत्र में रैली और रोड शो किया था।
यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का आदेश- नजूल और नगर पालिका क्षेत्र में होने से आदिवासी जमीन की खरीद वैध नहीं
इस दौरान चुनावी नारे लगाए गए और मतदाताओं से वोट मांगे गए। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 का उल्लंघन था। इस गतिविधि का वीडियो भी साक्ष्य के रूप में पेश किए जाने की बात कही गई है। याचिका में भूपेश बघेल का निर्वाचन निरस्त करने की मांग की गई है। हालांकि, ये आरोप अभी याचिकाकर्ता के दावे हैं, जिन पर अदालत में साक्ष्य और सुनवाई की प्रक्रिया जारी है।
हाई कोर्ट ने पक्षकारों की सहमति से चुनाव याचिका को 17 नवंबर 2026 को फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ आबकारी घोटाला: रामगोपाल अग्रवाल और अरुणपति त्रिपाठी को हाई कोर्ट से जमानत