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एसआईआर में बड़ी राहत: राज्य से बाहर हैं या मरीज तो स्वजन दे सकते हैं पेशी में गवाही

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी नए निर्देशों में मतदाता सूची में त्रुटि सुधार या नाम जुड़वाने के दौरान भौतिक रूप से उपस्थित नहीं होने पर आवेदन निरस्त हो जात...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Tue, 13 Jan 2026 09:30:14 PM (IST)Updated Date: Tue, 13 Jan 2026 09:42:23 PM (IST)
एसआईआर में बड़ी राहत: राज्य से बाहर हैं या मरीज तो स्वजन दे सकते हैं पेशी में गवाही
एसआईआर पर नया अपडेट।

HighLights

  1. अनमैप्ड और लाजिकल मामलों में निजी पेशी जरूरी नहीं।
  2. निर्वाचन आयोग ने घर से दूर रहने वालों को दी सुविधा।
  3. अब मतदाता सूची में नाम जुड़वाना भी आसान होगा।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। मतदाता सूची की पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान अब उन लोगों को सुनवाई के लिए अपने गांव या शहर आने की मजबूरी नहीं रहेगी, जो शिक्षा, इलाज या नौकरी के सिलसिले में राज्य से बाहर हैं या फिर मरीज हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने अनमैप्ड और लाजिकल एरर से जुड़े मामलों में व्यक्तिगत उपस्थिति के नियमों में छुट दी है। अब ऐसे मतदाताओं की अनुपस्थिति में उनके परिवार का कोई भी सदस्य जरूरी दस्तावेज दिखाकर सुनवाई की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।

इसी तरह, अस्पतालों में भर्ती मरीजों और उनके स्वजन के लिए भी सुनवाई में शामिल होना असंभव होता था। इन व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करने के लिए आयोग ने अब पारिवारिक प्रतिनिधित्व को अनुमति दी है। यह नियम केवल राज्य से बाहर रहने वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेश में रह रहे भारतीय नागरिकों (प्रवासी मतदाताओं) पर भी लागू होगा।


यदि कोई व्यक्ति विदेश में अध्ययन, आधिकारिक कार्य या चिकित्सा के लिए है, तो उसकी जगह परिवार का सदस्य ईआरओ या एईआरओ के समक्ष उपस्थित हो सकता है। इससे न केवल लोगों का समय और पैसा बचेगा, बल्कि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार के पंजीकरण से वंचित नहीं रहेगा। आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं।

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SIR in Bhopal: 9,921 मतदाताओं की हुई मैपिंग, 82,258 वोटरों को थमाया गया नोटिस

सैन्य कर्मियों और सरकारी कर्मचारियों को विशेष छूट

आयोग ने जारी आदेश में कहा है कि छुट के दायरे में राहत सैन्य, अर्द्धसैनिक बलों और सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) के कर्मचारियों के लिए भी है। सीमा पर तैनात जवानों या दूसरे राज्यों में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों को सिर्फ एक सुनवाई के लिए लंबी छुट्टी लेने की जरूरत है, उनके स्वजन संबंध सिद्ध करने वाले दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर मतदाता रिकार्ड को अपडेट करवा सकते हैं।

साथ रखें ये दस्तावेज, ईआरओ के पास होगी सुनवाई

सुनवाई के दौरान परिवार के सदस्य को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित 12 पहचान पत्रों में से कोई भी एक दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। इसमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट या अन्य मान्य पहचान पत्र शामिल हैं। साथ ही, उपस्थित होने वाले सदस्य को मतदाता के साथ अपना रिश्ता साबित करने वाला कोई प्रमाण देना होगा। इसके बाद अधिकारी व्यक्तिगत उपस्थिति की तरह ही मामले का निपटारा करेंगे।

विलोपन के दायरे में आए मतदाताओं का डेटा

जिले में कुल 16.75 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से अब तक 13.09 लाख का सत्यापन पूरा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार विलोपन की श्रेणी में मृतक मतदाता 71,752, शिफ्टेड (स्थान छोड़ चुके) मतदाता 1,70,019 व लापता मतदाता की संख्या 1,04,200 हैं। जिले में इन तीन श्रेणियों के आधार पर कुल 3,65,869 नामों पर अंतिम दावा-आपत्ति की प्रक्रिया में नोटिस जारी किया गया है।

मतदाता इन तिथियों और प्रक्रियाओं का रखें ध्यान

  • समय सीमा-दावा-आपत्ति दर्ज करने के लिए 22 जनवरी तक का समय निर्धारित है।
  • नया नाम जोड़ना- जिनका नाम सूची में नहीं है, वे फार्म भरकर आवेदन जमा कर सकते हैं।
  • अंतिम प्रकाशन- सभी दावों के निपटारे के बाद 21 फरवरी को अंतिम वोटर लिस्ट प्रकाशित हो सकती हैं।

मतदाता सूची को शुद्ध और समावेशी बनाना हमारा लक्ष्य है। जो मतदाता जायज कारणों से बाहर हैं, उनके लिए आयोग ने नियमों को सरल बनाया है। अब परिवार के सदस्यों के जरिए सत्यापन की सुविधा मिलने से पारदर्शिता बढ़ेगी और मतदाताओं की परेशानी कम होगी।

शिव कुमार बनर्जी, एडीएम बिलासपुर