
नईदुनिया न्यूज, दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में चार दशक से जारी माओवादी हिंसा निर्णायक चरण में पहुंचती नजर आ रही है। मार्च 2026 तक माओवादी हिंसा के समूल उन्मूलन के लक्ष्य के साथ चल रहे अभियानों के बीच संगठन के शीर्ष नेतृत्व के कमजोर पड़ने और लगातार प्रभावी सुरक्षा कार्रवाई के बाद माओवादियों के भीतर बिखराव स्पष्ट दिखने लगा है।
इसी कड़ी में शुक्रवार को दंतेवाड़ा में पुलिस के समक्ष कुल 63 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 1 करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपये के 36 इनामी माओवादी शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में 18 महिलाएं और 45 पुरुष हैं।
पुलिस ने क्या कहा
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पित माओवादी दरभा डिवीजन, दक्षिण और पश्चिम बस्तर, अबूझमाड़ क्षेत्र के साथ-साथ पड़ोसी ओडिशा में सक्रिय रहे हैं। हाल के महीनों में माओवादी संगठन को बड़े झटके लगे हैं। प्रमुख नेता बसव राजू और कुख्यात कमांडर हिड़मा के मारे जाने तथा पोलित ब्यूरो सदस्य भूपति और रुपेश के आत्मसमर्पण के बाद संगठन की संरचना कमजोर होती दिखाई दे रही है। सात दिन पहले तेलंगाना में पीएलजीए बटालियन नंबर-1 के प्रभारी बारसे देवा के आत्मसमर्पण ने इस प्रवृत्ति को और तेज किया। इससे पहले बुधवार को सुकमा में 64 लाख रुपये के इनामी 26 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत तत्काल 50-50 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही उन्हें कौशल विकास प्रशिक्षण, कृषि भूमि और रोजगारोन्मुखी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह मॉडल हिंसा छोड़ने के इच्छुक माओवादी कैडरों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।
डिविजनल और मिलिट्री कैडर के माओवादी शामिल
आत्मसमर्पण करने वालों में सात ऐसे इनामी माओवादी भी शामिल हैं, जिन पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें डिविजनल और एरिया कमेटी स्तर के पदाधिकारी तथा मिलिट्री कंपनी के सदस्य शामिल हैं। इन किया था और यह क्रम वर्ष 2026 में भी लगातार जारी है। कैडरों पर पिछले दो दशकों के दौरान सुरक्षा बलों पर हमले, एंबुश, आईईडी विस्फोट और आगजनी जैसी गंभीर घटनाओं में शामिल होने के आरोप दर्ज हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में 1573 माओवादियों ने आत्मसमर्पण
शांति और विकास के प्रति भरोसा बढ़ा
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने कहा कि ‘पूना मारगेम: पुनर्वास के माध्यम से पुनर्जीवन’ पहल से शांति और विकास के प्रति भरोसा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि हिंसा केवल पीड़ा देती है, जबकि पुनर्वास सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और भविष्य की राह खोलता है।
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