• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • जगदलपुर

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 23, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बोली संग गोली : डीआरजी की इसी खासियत ने बनाया उसे दुनिया का सबसे मारक बल

नक्सलियों के खिलाफ चलने वाले अभियान की अगुवाई महिला कमांडो करती हैं। वे स्थानीय बोली-भाषा के जानकार होने के साथ ही क्षेत्र के भूगोल की अच्छी समझ रखती ...और पढ़ें

By Shashank Shekhar BajpaiEdited By: Shashank Shekhar Bajpai
Publish Date: Thu, 23 Jan 2025 12:31:56 PM (IST)Updated Date: Thu, 23 Jan 2025 02:43:15 PM (IST)
बोली संग गोली : डीआरजी की इसी खासियत ने बनाया उसे दुनिया का सबसे मारक बल
बस्तर के अंदरुनी गांव की महिलाओं के साथ महिला कमांडो।

HighLights

  1. 2008 में जिला रिजर्व गार्ड यानी डीआरजी फोर्स बनाया गया था।
  2. गुरिल्ला लड़ाई में इस बल का आज की तारीख में नहीं कोई तोड़।
  3. 5000 से अधिक सफल अभियान, 800 नक्सलियों को किया ढेर।

अनिमेष पाल, ‌जगदलपुर। समर्पण कर चुके नक्सलियों को विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) बनाकर नक्सलियों के विरुद्ध उतारने की जो रणनीति बनाई गई थी। वहीं, 2008 में आधार बनी जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) बल की। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि डीआरजी गुरिल्ला युद्ध में दुनिया का सबसे खतरनाक बल है।

स्थानीय बोली-भाषा के जानकार होने के साथ ही क्षेत्र के भूगोल की अच्छी समझ होने से इस बल ने नक्सलियों पर पूरी तरह नकेल कस दी है। बल में सम्मिलित पूर्व नक्सली और महिला कमांडो इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। बल की अगुवाई महिला कमांडो करती हैं।


महिलाओं को इस बल में शामिल करने से अब नक्सलियों को जवानों पर शोषण का झूठा आरोप लगाने का भी मौका नहीं मिलता। डीआरजी ने एक दशक में पांच हजार से अधिक सफल अभियान और 800 से अधिक नक्सलियों को ढेर किया है।

naidunia_image

एक साल में 273 नक्सली किए ढेर

पिछले एक वर्ष में बस्तर में 273 नक्सलियों को मार गिराया गया है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान डीआरजी बल का रहा है। इस समय बस्तर में 50 हजार से अधिक सुरक्षा बल तैनात हैं, जिसमें लगभग 4,000 डीआरजी के जवान हैं। इसके बाद भी बस्तर में नक्सल अभियान की अगुवाई डीआरजी करता है।

यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ में नक्सलियों को एक और झटका, सुकमा की प्राचीन गुफा में छिपा रखा था हथियारों का जखीरा, जवानों ने किया जब्त

नक्सल संगठन छोड़कर 2014 में डीआरजी में भर्ती होकर इंस्पेक्टर रैंक तक पहुंचे एक अधिकारी कहते हैं कि नक्सल संगठन में रहने के कारण हमें नक्सलियों की रणनीति के बारे में जानकारी रहती है। इसका हमें रणनीतिक लाभ मिलता है। स्थानीय गोंडी-हल्बी बोली बोलते हैं, जिससे खुफिया सूचना भी हमें ग्रामीणों से मिल जाती है।

कई राज्यों में प्रशिक्षण, 12 घंटे रोजाना एक्सरसाइज

नक्सल मोर्चे पर डीआरजी जवानों की सफलता तो दिखाई देती है, लेकिन इसके पीछे कड़ा अभ्यास भी है। डीआरजी ने असम, तेलंगाना से लेकर कई राज्यों में गुरिल्ला युद्ध का विशेष प्रशिक्षण लिया है। यहां तक कि श्रीलंका से भी विशेषज्ञ बुलाकर जवानों को प्रशिक्षण दिया गया है।

यह भी पढ़ें- बस्तर, दंतेवाड़ा, सूरजपुर, कोरबा, रायगढ़, बलौदाबाजार में एक अप्रैल से महिलाओं के हाथ होगा रेडी टू ईट फूड

दंतेवाड़ा पुलिस अधीक्षक गौरव राय कहते हैं कि डीआरजी के जवान या तो अभियान पर होते हैं, या फिर मैदान में। प्रतिदिन 12 घंटे कड़ा अभ्यास सत्र होता है, ताकि लंबे अभियान में वे थके नहीं। घने जंगल के भीतर तीन से चार दिन तक बिना खाए-पिए और सोए 70 किलो से अधिक वजन लेकर यह बल 100 किमी तक पैदल अभियान करने में सक्षम है।