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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 11, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Raipur News: 20 करोड़ में बेची मंदिर की 4.40 एकड़ जमीन, दो साल बाद भी कार्रवाई अधूरी

रायपुर के चंगोराभाटा स्थित सीरवेश्वरनाथ महादेव मंदिर की जमीन को अवैध रूप से बेचने के मामले में पिछले 2 सालों में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। 2...और पढ़ें

By Roman TiwariEdited By: Roman Tiwari
Publish Date: Thu, 11 Sep 2025 03:18:42 PM (IST)Updated Date: Thu, 11 Sep 2025 03:24:17 PM (IST)
Raipur News: 20 करोड़ में बेची मंदिर की 4.40 एकड़ जमीन, दो साल बाद भी कार्रवाई अधूरी
20 करोड़ में बेची मंदिर की जमीन

HighLights

  1. रायपुर में मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जा
  2. मंदिर की4.4 एकड़ जमीन को 20 करोड़ में बेचा
  3. लोगों की शिकायत पर हुई कार्रवाई, कोई परिणाम नहीं

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर: राजधानी के चंगोराभाठा क्षेत्र में स्थित सीरवेश्वरनाथ महादेव मंदिर की जमीन 20 करोड़ में बेचने आरोप स्थानीय लोगों ने लगाया है। वर्ष 2022 में इस जमीन पर अवैध प्लाटिंग और बिक्री की शिकायतें सामने आई थीं। नगर निगम द्वारा तत्कालीन कार्रवाई में बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण हटाए गए, लेकिन अब तक न तो जांच पूरी हुई और न ही जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई की गई।

बता दें कि यह भूमि पटवारी हल्का क्रमांक 105, खसरा नंबर 84, रकबा 4.40 एकड़ में दर्ज है, जो रिंग रोड स्थित श्याम पेट्रोल पंप के पीछे तथा अभिनंदन पैलेस के समीप स्थित है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह भूमि मंदिर और तालाब से जुड़ी सार्वजनिक संपत्ति है, जिस पर निजी स्वामित्व दर्शाकर बिना अनुमति प्लाटिंग की गई और बिक्री भी कर दी गई। इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्रवासियों ने 7 जून 2022 को तत्कालीन कलेक्टर व नगर निगम आयुक्त को लिखित शिकायत सौंपी थी।


यह हुई थी शिकायत

शिकायत में जमीन पर अवैध प्लाटिंग रोकने, रजिस्ट्री पर तत्काल रोक लगाने, बंधक किए गए रास्ते को मुक्त करने और दोषियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई थी। इसके बाद 16 जून 2022 को नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध प्लाटिंग पर बुलडोजर चलाया था। बावजूद इसके, जांच की प्रक्रिया अधूरी पड़ी है और जमीन अब भी विवादों के घेरे में है।

बदले में दी गई थी जमीन

संजय अग्रवाल व मंदिर प्रबंधन का पक्ष है कि सभी कार्रवाई कानूनी रूप से की गई है। कोर्ट ने इस मामले में उनके पक्ष में निर्णय दिया है। उनका कहना है कि मंदिर की जमीन के बदले दूसरी उपयुक्त जमीन दी गई है, जिससे किसी प्रकार की धार्मिक भावना को ठेस न पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है और सभी दस्तावेज वैध हैं। मंदिर समिति और संबंधित अधिकारियों की सहमति से यह कदम उठाया गया है। उनका उद्देश्य विकास कार्यों में सहयोग देना और धार्मिक स्थलों का सम्मान बनाए रखना है।

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प्रकरण की जांच के संबंध में कलेक्टर को निर्देशित किया था। रिपोर्ट के संबंध में जानकारी ली जाएगी।

-टंकराम वर्मा, मंत्री, राजस्व विभाग