
जितेंद्र सिंह दहिया, नईदुनिया, रायपुर। रायपुर में दीवाली की रौनक अपने चरम पर है। चारों ओर साफ-सफाई, पटाखे और गुलाबी ठंड के बीच एक अलग ही उत्साह है, लेकिन इस खुशनुमा माहौल के बीच आने वाले दिनों में हवा का मिजाज बदलने की पूरी आशंका है। साफ-सुथरी फिजा बारूदी धुएं में तब्दील होने वाली है। ऐसे में अपनी सेहत और सांसों का विशेष ख्याल रखना जरूरी है।
फिलहाल राहत की बात है कि रायपुर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 54 से 78 के बीच यानी संतोषजनक श्रेणी में है। हालांकि पिछले आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। वर्ष 2024 में दीवाली के दौरान एक्यूआई 279 तक पहुंच गया था जबकि 2025 में यह 149 दर्ज किया गया था।
इस बार भी त्योहार के दौरान प्रदूषण का ग्राफ बढ़ने का खतरा बना हुआ है। मालवीय रोड, गोलबाजार और सदर बाजार जैसे व्यस्त इलाकों में रेंगते वाहनों का धुआं स्थानीय हवा को प्रभावित कर रहा है। इसके अलावा घरों की सफाई के दौरान उड़ने वाले धूलकण हवा में घुल रहे हैं और बाद में आतिशबाजी से निकलने वाला धुआं प्रदूषण बढ़ाएगा।

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दीवाली की सफाई में सूखी झाड़ू के बजाय गीले कपड़े और पोछे का इस्तेमाल करें। कालीन, पर्दे और फर्नीचर की धूल खुले में न झाड़ें। पटाखों से बचें और घरों के आसपास कचरा या पत्तियां न जलाएं। सांस के रोगी आतिशबाजी वाले स्थानों पर जाने से बचें। - शम्स परवेज, पर्यावरणविद्
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