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बिलासपुर हाई कोर्ट का फैसला, GST के 42 कमर्शियल टैक्स इंस्पेक्टरों की पदोन्नति रद्द करने का आदेश बरकरार

महासमुंद के पिथौरा में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ शिक्षक का बिना मूल विभाग में वापसी के तबादला करने के मामले में हाई कोर्ट ने 30 सितंबर के आदेश पर रोक लगा दी है।

By Kamlesh RajakEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Tue, 03 Nov 2026 07:42:14 AM (IST)Updated Date: Tue, 03 Nov 2026 07:42:14 AM (IST)
बिलासपुर हाई कोर्ट का फैसला, GST के 42 कमर्शियल टैक्स इंस्पेक्टरों की पदोन्नति रद्द करने का आदेश बरकरार
बिलासपुर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. प्रतिनियुक्ति वाले शिक्षक के तबादले पर HC की रोक।
  2. पिथौरा के स्वामी आत्मानंद स्कूल में पदस्थ हैं शिक्षक।
  3. DEO ने बिना मूल विभाग में वापसी के किया तबादला।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के वाणिज्यिक कर विभाग में सीमित भर्ती परीक्षा के माध्यम से लिपिकीय संवर्ग से वाणिज्यिक कर निरीक्षक के पद पर पदोन्नत किए गए 42 कर्मचारियों को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाई कोर्ट जस्टिस बीडी गुरु की एकलपीठ ने पदोन्नति प्रक्रिया निरस्त करने के राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखते हुए कर्मचारियों की याचिका खारिज कर दी है। इसके बाद इन कर्मचारियों को वाणिज्यिक कर निरीक्षक के पद से हटकर अपने मूल लिपिकीय पद पर लौटना होगा।

वर्ष 2021-22 में सीमित भर्ती परीक्षा के जरिए विभाग के लिपिकीय संवर्ग के 42 कर्मचारियों को वाणिज्यिक कर निरीक्षक के पद पर पदोन्नति दी थी। बाद में परीक्षा और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आईं। जांच में चयनित कर्मचारियों की उत्तर-पुस्तिकाओं में जवाबों की समानता सहित कई गंभीर गड़बड़ियां मिलने की बात सामने आई। इसके बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित की थी।


उत्तर-पुस्तिकाओं में एक जैसे जवाब मिले

जांच समिति ने पाया कि कई चयनित कर्मचारियों की उत्तर-पुस्तिकाओं में एक जैसे जवाब लिखे गए थे। कुछ उत्तर माडल उत्तरों से भी काफी हद तक मिलते थे। जीएसटी के नियमों और धाराओं से संबंधित प्रश्नों के जवाब में भी समानता पाई गई। गणित के कुछ सवालों के सीधे उत्तर लिखे मिले, जबकि उनके हल के लिए रफ वर्क नहीं किया गया था। डॉ. खूबचंद बघेल की जीवनी पर आधारित निबंध के जवाबों में भी समानता सामने आई।

परीक्षा का मूल रिकॉर्ड भी नहीं मिला

जांच में परीक्षा केंद्र की उपस्थिति पंजी उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। इससे यह स्पष्ट करने में कठिनाई हुई कि परीक्षा में वास्तव में कौन-कौन कर्मचारी शामिल हुए थे। परीक्षा की समेकित अंक तालिका भी तैयार नहीं की गई थी। उत्तर-पुस्तिकाओं में ऐसी गोपनीय कोडिंग व्यवस्था नहीं थी, जिससे मूल्यांकन के दौरान अभ्यर्थियों की पहचान छिपी रहे।

एक साथ कई गड़बड़ियां हुई थीं उजागर

समिति ने यह भी पाया कि कुछ कर्मचारियों की उत्तर-पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के बाद अंक बढ़ाए गए और वे चयन सूची में शामिल हो गए। पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया में चयन समिति से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। इसके अलावा पदों का वर्गवार आरक्षण रोस्टर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तैयार नहीं किए जाने और उत्तर-पुस्तिकाओं की खरीदी, उपयोग तथा शेष संख्या के रिकार्ड में अंतर की बात भी रिपोर्ट में दर्ज की गई।

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जांच रिपोर्ट के आधार पर रद हुआ था चयन

  • चयन समिति में तत्कालीन अपर आयुक्त कल्पना तिवारी, तत्कालीन संयुक्त आयुक्त और वर्तमान अपर आयुक्त टीआर धुर्वे तथा सहायक आयुक्त रौशन सिंह शामिल थे। उस समय विभाग के आयुक्त समीर विश्नोई थे। जांच समिति ने परीक्षा और चयन प्रक्रिया को दोषपूर्ण बताते हुए उसे निरस्त करने की अनुशंसा की थी।
  • इसके आधार पर राज्य कर आयुक्त ने पदोन्नति प्रक्रिया रद कर 42 कर्मचारियों को वाणिज्यिक कर निरीक्षक के पद से हटाकर उनके मूल लिपिकीय पद पर वापस भेजने का आदेश जारी किया था।
  • राज्य सरकार के इस फैसले को चुनौती देते हुए कर्मचारियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही पदोन्नति निरस्त करने का सरकारी आदेश प्रभावी बना रहेगा।

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