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बीरगांव निगम चुनाव में साहू वोट बैंक पर टिकी भाजपा-कांग्रेस की नजर, महापौर पद के लिए 7 महिला दावेदार

बीरगांव नगर निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस की नजर 20 हजार साहू मतदाताओं पर टिक गई है। महापौर पद के लिए भाजपा में पांच और कांग्रेस में दो महिला दावेदार रेस में हैं।

By Jitendra DahiyaEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Thu, 05 Nov 2026 08:24:58 AM (IST)Updated Date: Thu, 05 Nov 2026 08:24:58 AM (IST)
बीरगांव निगम चुनाव में साहू वोट बैंक पर टिकी भाजपा-कांग्रेस की नजर, महापौर पद के लिए 7 महिला दावेदार
बीरगांव निगम चुनाव में साहू वोट बैंक पर टिकी भाजपा-कांग्रेस की नजर।

HighLights

  1. बीरगांव निगम चुनाव में साहू वोट बैंक पर नजर।
  2. कुल 65 हजार मतदाताओं में 20 हजार साहू वोटर।
  3. बीरगांव क्षेत्र में करीब 50 प्रतिशत ओबीसी मतदाता हैं।

जितेंद्र सिंह दहिया, रायपुर। विधानसभा चुनाव में साहू समाज के राजनीतिक प्रभाव और उसके समर्थन से बने समीकरणों के बाद अब बीरगांव नगर निगम चुनाव में भी भाजपा और कांग्रेस की नजर इसी वोट बैंक पर टिक गई है। करीब 65 हजार मतदाताओं वाले बीरगांव में साहू समाज के वोटरों की संख्या लगभग 20 हजार बताई जा रही है। वहीं, क्षेत्र में ओबीसी मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत है।

महापौर चुनाव के लिए दोनों दल साहू समाज की महिला दावेदारों के नामों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। पार्टी के भीतर दावेदारों की संख्या और उनके स्थानीय प्रभाव को लेकर गुणा-भाग शुरू हो गया है। भाजपा में महापौर पद के लिए पांच नामों की चर्चा है। इनमें पद्मावती ओमप्रकाश साहू के साथ पूर्व महापौर अंबिका यदु, फूलमती सोनवानी, पदमा चंद्राकर और ज्ञानेश्वरी मेझा दावेदारी कर रही हैं।


दूसरी ओर कांग्रेस में लुकेश्वरी लखन साहू और वर्तमान महापौर की पत्नी प्रेमलता देवांगन के नाम सामने आ रहे हैं। प्रेमलता देवांगन पांच साल जनपद अध्यक्ष, जिला पंचायत सभापति समेत कई महत्वपूण पदों पर रह चुकी हैं। इस तरह महापौर पद के लिए भाजपा में दावेदारों की संख्या कांग्रेस से अधिक है। दोनों दलों में दावेदारों के समर्थक अपनी-अपनी राजनीतिक पकड़ और जीत की संभावनाएं पार्टी नेतृत्व के सामने रखने में जुटे हैं।

20 हजार वोटों पर नजर, लेकिन केवल जातीय समीकरण काफी नहीं

  • बीरगांव में करीब 20 हजार साहू मतदाताओं का आंकड़ा किसी भी दल के लिए अहम है। कुल मतदाताओं के मुकाबले यह संख्या इतनी बड़ी है कि इसे नजरअंदाज कर चुनावी रणनीति बनाना आसान नहीं होगा। ओबीसी मतदाताओं की करीब 50 प्रतिशत हिस्सेदारी भी इस वर्ग के राजनीतिक महत्व को बढ़ाती है।

  • यही वजह है कि साहू समाज से आने वाले संभावित चेहरों को लेकर दोनों दलों में चर्चा तेज है। हालांकि, केवल समाज के वोटों के भरोसे जीत तय नहीं मानी जा सकती। प्रत्याशी की अपने वार्ड में पकड़, दूसरे समाजों में स्वीकार्यता, व्यक्तिगत छवि और संगठन के साथ तालमेल भी नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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    भाजपा में पांच नाम, कांग्रेस में दो चेहरों पर चर्चा

    भाजपा में पद्मावती ओमप्रकाश साहू, पूर्व महापौर अंबिका यदु, फूलमती सोनवानी, पदमा चंद्राकर और ज्ञानेश्वरी मेझा के नाम चर्चा में हैं। कांग्रेस में लुकेश्वरी लखन साहू और प्रेमलता देवांगन को लेकर दावेदारी की बात सामने आ रही है। इसके अलावा दोनों दलों के कई एमआईसी सदस्य भी महापौर पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। ऐसे में टिकट का फैसला केवल सामाजिक समीकरण से नहीं, बल्कि स्थानीय राजनीतिक ताकत और चुनावी संभावनाओं के आकलन से होने की संभावना है।

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