
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया. रायपुर: प्रदेश की 14 पूर्ववर्ती रियासतों का गौरवशाली इतिहास अब एक ही छत के नीचे देखने को मिलेगा। राज्य सरकार इन रियासतों की राजसी परंपराओं, दुर्लभ धरोहरों और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए ‘रियासत वीथिका’ स्थापित करने की योजना बना रही है।
इसमें राजपरिवारों के निजी संग्रहों, महलों, संग्रहालयों और अभिलेखागारों में संरक्षित ऐतिहासिक सामग्री को एक मंच पर प्रदर्शित करने की तैयारी है। इससे नई पीढ़ी को प्रदेश के राजसी अतीत से परिचित कराने के साथ पर्यटन को भी नया आकर्षण मिलने की उम्मीद है।
इस संबंध में मंगलवार को रायपुर स्थित उद्योग भवन में पर्यटन मंडल के सभाकक्ष में राजपरिवारों के वंशजों और प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। पर्यटन एवं संस्कृति विभाग ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिए प्रस्तावित वीथिका की कार्ययोजना रखी और उनसे सुझाव लिए। सरकार की योजना है कि राजपरिवारों की सहभागिता से ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण, दस्तावेजीकरण और प्रदर्शन किया जाए।
प्रस्तावित वीथिका में रियासतों की राजदरबारी परंपराओं, राजचिह्नों, पारंपरिक वेशभूषा, अस्त्र-शस्त्र, प्राचीन सिक्कों, मुहरों और ऐतिहासिक दस्तावेजों को जगह देने की योजना है। इसके साथ ही तीज-त्योहारों, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक परंपराओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इस तरह यह गैलरी केवल राजमहलों के वैभव तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अलग-अलग रियासतों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को भी सामने लाएगी।
बैठक में रायगढ़, सरगुजा, सारंगढ़, कवर्धा, छुईखदान, उदयपुर-धरमजयगढ़, खैरागढ़ और सक्ती सहित विभिन्न राजपरिवारों के प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने वीथिका को अधिक प्रभावी और आकर्षक बनाने के लिए सुझाव दिए। प्रस्तावित गैलरी विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए इतिहास को समझने का केंद्र बन सकती है। वहीं, देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी प्रदेश की रियासतों के इतिहास और सांस्कृतिक वैभव से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।
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