
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पतालों के लिए आयुर्वेदिक दवाओं की खरीदी के टेंडर में दो सरकारी कंपनियों के दस्तावेजों में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। शिकायत के अनुसार, कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (केएपीएल) की आठ दवाओं का तीन साल उत्पादन नहीं होने का उल्लेख है, जबकि एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड की ओर से पेश कुछ दवाओं के नाम और निर्धारित मानकों पर सवाल उठे हैं।
अधिवक्ता नीलम सिंह यादव ने इसे पात्रता जांच में गंभीर चूक बताते हुए सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक को कानूनी नोटिस भेजा है। उन्होंने दोनों कंपनियों की दो-दो लाख रुपये की धरोहर राशि जब्त करने, तीन से पांच साल तक सरकारी खरीदी से बाहर रखने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। संबंधित निविदा 22 जून 2026 को जारी हुई थी, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया।
अधिवक्ता का आरोप है कि केएपीएल ने निविदा में उत्पाद अनुमति की जरूरी सूची अपलोड नहीं की थी। शिकायत में इस पर जांच के दौरान आपत्ति आने का उल्लेख भी है। कंपनी के तत्कालीन प्रबंध संचालक से जुड़े सीबीआई प्रकरण का हवाला देकर सदाचार घोषणा की जांच मांगी गई है। पत्र में एफआइआर क्रमांक RC0082026A0012, दिनांक 15 जुलाई 2026 का उल्लेख है।
सीजीएमएससी के अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। नोटिस में 15 दिन के भीतर कार्रवाई शुरू नहीं होने पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में जनहित याचिका और केंद्रीय सतर्कता आयोग, लोकायुक्त तथा प्रवर्तन निदेशालय में शिकायत करने की चेतावनी दी गई है। नीलम सिंह यादव, अधिवक्ता