छत्तीसगढ़ कांट्रैक्टर्स एसोसिएशन का आर-पार की लड़ाई का ऐलान, आज 5000 करोड़ के भुगतान के लिए रायपुर में अर्धनग्न आंदोलन
छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन के ठेकेदारों का 5000 करोड़ का भुगतान तीन साल से अटका है। भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे ठेकेदार 27 अक्टूबर को रायपुर में अर्धनग्न प्रदर्शन करेंगे।
Publish Date: Tue, 27 Oct 2026 07:56:12 AM (IST)Updated Date: Tue, 27 Oct 2026 07:56:12 AM (IST)
छत्तीसगढ़ कांट्रैक्टर्स एसोसिएशन का आर-पार की लड़ाई का ऐलान। (एआई जनरेटेड)HighLights
- जल जीवन मिशन का 5000 करोड़ रुपये का भुगतान अटका।
- तीन साल से बिल पास न होने से ठेकेदार परेशान।
- रायपुर में ठेकेदार अर्धनग्न होकर कटोरा लेकर प्रदर्शन करेंगे।
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ में 'जल जीवन मिशन' के तहत काम करने वाले हजारों ठेकेदारों का सब्र अब जवाब दे चुका है। पिछले तीन साल से 5,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम भुगतान अटकने के कारण प्रदेशभर के ठेकेदार गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
अपनी मांगों को लेकर लगभग दो हजार ठेकेदार मंगलवार (27 अक्टूबर) को राजधानी रायपुर के घड़ी चौक, आंबेडकर चौक और शास्त्री चौक पर अर्धनग्न होकर और हाथों में भीख मांगने वाला कटोरा लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। छत्तीसगढ़ कांट्रैक्टर्स एसोसिएशन के बैनर तले ठेकेदारों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
कर्ज के बोझ और ईएमआई के दबाव में ठेकेदार
- जल जीवन मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाना है। इसे साकार करने के लिए ठेकेदारों ने अपनी जमा-पूंजी लगाकर मल्टी विलेज, सिंगल विलेज, रेट्रोफिटिंग, सोलर आधारित जल योजनाएं और नलकूप खनन जैसे कई अहम काम पूरे किए।
- इन निर्माण कार्यों के लिए ठेकेदारों ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से मोटा कर्ज लिया था। लेकिन तीन वर्षों से बिल पास न होने के कारण अब बैंक की किस्तें (ईएमआई) चुकाना असंभव हो गया है। मजदूरों की मजदूरी और निर्माण सामग्री सप्लायर्स का पैसा भी फंसा हुआ है। एसोसिएशन का कहना है कि कई ठेकेदार बैंक डिफॉल्टर घोषित होने की कगार पर हैं और उनके सामने रोजी-रोटी का भयंकर संकट खड़ा हो गया है।
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समन्वय की कमी से रुके भुगतान
- छत्तीसगढ़ कांट्रैक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीरेश शुक्ला के अनुसार, ठेकेदारों ने संसाधनों और कर्ज के सहारे अधिकांश काम पूरा कर लिया है। लेकिन केंद्र व राज्य की वित्तीय प्रक्रिया में फंसा पेंच और पंचायत व लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के बीच तालमेल की कमी की वजह से पैसों का भुगतान नहीं हो पा रहा है।
- एसोसिएशन का दावा है कि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंपने के बावजूद उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं, धरातल पर भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।
योजना के जमीनी क्रियान्वयन पर भी उठ रहे सवाल
- भुगतान समय पर न होने की वजह से कई गांवों में पानी की टंकियां और पाइपलाइन तैयार होने के बावजूद जल आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है। पैसों के अभाव में संचालन और रखरखाव (मेंटेनेंस) का काम भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
- ठेकेदारों की मांग है कि लंबित 5,000 करोड़ की राशि का जल्द से जल्द भुगतान किया जाए, ताकि रुके हुए विकास कार्य फिर से सुचारू रूप से शुरू हो सकें और ग्रामीणों को समय पर शुद्ध पेयजल मिल सके।
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