
डिजिटल डेस्क, बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक बहू ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर ससुर को करंट लगाकर मौत के घाट उतार दिया। प्रेमी हारमोनियम सिखाने के बहाने अक्सर रात में घर आता था, जिसका ससुर विरोध करता था। इसी बात से नाराज होकर दोनों ने हत्या की साजिश रची।
मामले का खुलासा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, कॉल डिटेल और अन्य साक्ष्यों से हुआ, जिसके बाद कोर्ट ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह पूरी घटना डौंडीलोहारा थाना क्षेत्र के खड़ेनाडीह गांव की है।
मृतक की बहू गीता निर्मलकर (30) गांव की सेवा मंडली में भजन गाती थी, जहां उसकी मुलाकात पड़ोसी गांव के संगीतकार लेखराम निषाद (25) से हुई। लेखराम उसे हारमोनियम सिखाता था और इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गईं। ससुर मनोहर निर्मलकर (63) को उनका यह रिश्ता पसंद नहीं था और लेखराम के घर आने पर वह अक्सर गाली-गलौज करता था। इसी से तंग आकर गीता और लेखराम ने 16 जुलाई की रात सोते हुए ससुर को करंट लगाकर मार डाला।

हत्या के बाद अगली सुबह बहू ने गांव वालों को बताया कि ससुर शराब के नशे में साइकिल से गिर गए थे और सुबह उनकी मौत हो गई। चोटों को छिपाने के लिए उसने शव पर हल्दी लगा दी। लेकिन, जब शव श्मशान पहुंचा और कपड़ा हटाया गया, तो गहरे घावों को देखकर ग्रामीणों को शक हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचना दी।
लेखराम चाहता था कि जल्द से जल्द अंतिम संस्कार हो जाए ताकि मामला दब जाए। उसने आनन-फानन में श्मशान में लकड़ियां भिजवाईं और खुद शव को कंधा भी दिया। इस जल्दबाजी पर गांव वालों को शक हुआ और उन्होंने सवाल-जवाब किए। इसी दौरान शरीर पर चोट के निशान दिखने पर ग्रामीणों ने पुलिस को बुला लिया।
शॉर्ट पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में करंट से मौत की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने कॉल डिटेल और तकनीकी साक्ष्य जुटाए। घटना में इस्तेमाल बिजली का तार, रबर के दस्ताने, खून लगा गमछा और मोबाइल भी जब्त किए गए। इन्हीं सबूतों के आधार पर गीता और लेखराम को गिरफ्तार किया गया।
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मामले की सुनवाई के बाद एडीजे न्यायालय ने गीताबाई और लेखराम निषाद को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले की जांच तत्कालीन थाना प्रभारी मुकेश सिंह ने की और अभियोजक घनश्याम सिंह साहू ने न्यायालय में पैरवी की।
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