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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 12, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सौर ऊर्जा से रोशन होंगी छत्तीसगढ़ की हाउसिंग सोसाइटीज, बिजली का बिल भी होगा कम

केंद्र सरकार ने सोलर ऊर्जा के माध्यम से 2030 तक देश में 500 बिलियन वॉट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। आवासीय सोसाइटी में सोलर प्लांट लगाने से यहां के...और पढ़ें

By Shashank Shekhar BajpaiEdited By: Shashank Shekhar Bajpai
Publish Date: Thu, 12 Dec 2024 01:44:47 PM (IST)Updated Date: Thu, 12 Dec 2024 01:44:47 PM (IST)
सौर ऊर्जा से रोशन होंगी छत्तीसगढ़ की हाउसिंग सोसाइटीज, बिजली का बिल भी होगा कम
सोलर प्लांट लगाने के लिए क्रेडा के अधिकारी आवासीय सोसाइटियों का सर्वे भी कर रहे हैं।

HighLights

  1. सोसाइटी में सोलर प्लांट लगाने क्रेडा ने शुरू किया सर्वे l
  2. आवासीय सोसाइटी और रेस्को की लेनी होगी सहमति।
  3. रेस्को और कैपेक्स जैसी दो योजनाएं लांच की जा रही हैं।

राज्य ब्यूरो, रायपुर। राज्य में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य ऊर्जा अक्षय विकास अभिकरण (क्रेडा) ने हाउसिंग सोसाइटियों को सोलर ऊर्जा से रोशन करने की तैयारी की है। क्रेडा के अधिकारी आवासीय सोसाइटियों का सर्वे भी कर रहे हैं। बीते दिनों क्रेडा ने हाउसिंग सोसाइटियों की बैठक भी ली थी।

अधिकारियों का कहना है कि आवासीय सोसाइटी में सोलर प्लांट लगाने से यहां के रहवासियों को लाभ होगा। इसका खर्च भी आवासीय सोसाइटी और रेस्को (रिन्यूएबल एनर्जी सर्विस कंपनी) मिलकर करेंगे। वहीं, केंद्र सरकार ने सोलर ऊर्जा के माध्यम से 2030 तक देश में 500 बिलियन वॉट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है।


दो योजनाएं होगी लांच

सोसाइटियों में सौर संयंत्र लगाने के लिए रेस्को और कैपेक्स जैसी दो योजनाएं लांच की जा रही हैं। कैपेक्स मॉडल के अंतर्गत सोसाइटियों को इसका पूरा खर्च वहन करना होगा। वहीं, रेस्को के तहत वेंडर पूरा सिस्टम लगाएगा और कॉलोनी के लोग न्यूनतम दर पर बिजली खरीदेंगे।

क्रेडा के सीईओ राजेश सिंह राणा ने बताया कि प्रदेश की सभी छोटी बड़ी कॉलोनियों को ग्रीन एनर्जी से जोड़ने के लिए इस दिशा में काम हो रहा है। सर्वे शुरू हो चुका है। इससे बिजली बिल भी कम आएगा।

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यह होता है रेस्को मॉडल

रिन्यूएबल एनर्जी सर्विस कंपनी (रेस्को) मॉडल के तहत बिजली की मांग के अनुसार सोसाइटी में सोलर पावर प्लांट लगाया जाता है। इसमें शुरुआती खर्च रेस्को करता है। उत्पादित होने वाली बिजली को तय कीमत पर आवासीय सोसाइटी को बेचा जाता है। यह बिजली बिल की तुलना में एक तिहाई होता है। एक समय के बाद यह संयंत्र सोसाइटी के हवाले कर दिया जाता है।

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यह होता है कैपेक्स मॉडल

कैपिटल एक्सपेंडिचर मॉडल (कैपेक्स) के तहत आवासीय सोसाइटी सोलर प्लांट लगाने का पूरा खर्च वहन करती है। इसमें सोसाइटी का ही मालिकाना हक होता है। प्लांट से उत्पादित बिजली का उपयोग यूटिलिटी बिजली भार में किया जाता है।

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इतने रुपये की होगी बचत

रेस्को मॉडल के तहत 100 किलोवॉट का सौर संयंत्र लगाया जाता है, तो हर महीने 90 हजार की बचत होगी। वहीं कैपेक्स माडल से 1.13 लाख रुपये प्रति माह की बचत होती है। 100 किलोवॉट क्षमता का प्लांट लगाने के लिए 800 से 850 वर्ग मीटर जगह होनी जरूरी है।