
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। हाई कोर्ट ने ड्रग इंस्पेक्टर नीरज साहू की तीन वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकने के आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि उनके खिलाफ आरोपों पर जवाब देने के बावजूद नियमानुसार निष्पक्ष प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
पहले तीन वेतन वृद्धियां रोकने की सजा दी गई थी, जिसे अपील में घटाकर दो कर दिया गया। हाई कोर्ट ने मूल दंडादेश और अपीलीय आदेश दोनों रद कर दिए।
हालांकि, शासन को नियमों के अनुसार नए सिरे से कार्रवाई करने की छूट दी गई है, यानी आदेश निरस्त होने से मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, विभाग उचित प्रक्रिया अपनाकर आगे बढ़ सकता है।
जांच रिपोर्ट दिए बिना की कार्रवाई
नीरज साहू ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर विभागीय कार्रवाई को चुनौती दी थी। उनके अनुसार, 21 जनवरी को कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद उन्होंने 23 जनवरी को अपना जवाब दिया था। इसके बावजूद 11 फरवरी को उनकी तीन वार्षिक वेतन वृद्धियां संचयी प्रभाव के बिना रोकने का आदेश जारी कर दिया गया।
साहू का यह भी कहना था कि कार्रवाई का आधार बनी संयुक्त समिति की 23 दिसंबर 2025 की जांच रिपोर्ट मांगने के बावजूद उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर नहीं मिला।
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नियमों का पालन जरूरी
न्यायमूर्ति विभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने नौ सितंबर 2026 को दिए फैसले में मूल दंडादेश और 13 जुलाई 2026 के अपीलीय आदेश को निरस्त कर दिया। मामला छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 16 से जुड़ा था।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामूली दंड के मामलों में भी कर्मचारी को आरोपों का जवाब देने और प्रभावी बचाव का उचित अवसर मिलना चाहिए। संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए बिना और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई कार्रवाई टिक नहीं सकती।
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