
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया. रायपुर। शहरों की व्यवस्था संभालने वाले नगर निगम खुद कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। 14 नगर निगमों में राजस्व निरीक्षक, सहायक राजस्व निरीक्षक, सहायक वर्ग-तीन और उप अभियंता के कुल 1,465 स्वीकृत पदों में से 1,127 खाली हैं।
यानी करीब 77 प्रतिशत पदों पर कर्मचारी नहीं हैं। इन रिक्तियों को भरने के लिए निगमों ने 266 पदों पर सीधी भर्ती का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन वित्त विभाग ने केवल 85 पदों पर भर्ती की सहमति दी। अमले की कमी का असर निगमों के रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ रहा है।
संपत्ति कर वसूली, राजस्व सर्वे, अवैध निर्माणों की निगरानी, विकास कार्यों की तकनीकी जांच और निर्माण की गुणवत्ता पर नजर रखने जैसे काम प्रभावित हो रहे हैं। उप अभियंताओं और राजस्व अमले के पद खाली होने से निगमों की कार्यक्षमता पर दबाव बढ़ रहा है।
राजस्व निरीक्षक के 92 स्वीकृत पदों में 52 खाली हैं। उप अभियंता के 336 में से 194, सहायक राजस्व निरीक्षक के 436 में से 274 और सहायक वर्ग-तीन के 593 में से 500 पद रिक्त हैं। कार्यालयीन कामकाज से लेकर राजस्व वसूली और तकनीकी निगरानी तक के लिए पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं।
राजधानी समेत बड़े निगमों में संकट
राजधानी में चारों श्रेणियों के 344 स्वीकृत पदों में से 241 खाली हैं, जबकि भर्ती के लिए केवल 22 पद प्रस्तावित किए गए थे। भिलाई में 113, दुर्ग में 121, कोरबा में 102 और बिलासपुर में 160 पद रिक्त हैं। बिलासपुर में 230 स्वीकृत पदों के मुकाबले 160 पद खाली हैं, यानी करीब 68 प्रतिशत पदों पर अमला नहीं है।
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14 नगर निगमों में पदों की स्थिति
श्रेणी : स्वीकृत पद - रिक्त पद
राजस्व निरीक्षक : 92 - 52
सहायक राजस्व निरीक्षक : 436 - 274
सहायक वर्ग- 3 : 593 - 500
उप अभियंता : 336 - 194
कुल : 1465 - 1127
वित्त विभाग को रिक्त पदों पर भर्ती के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। इनमें से कुछ पदों पर भर्ती की मंजूरी मिली है। कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए निगमों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से भी नियुक्तियां की गई हैं। नीलेश कुमार महादेव क्षीरसागर, संचालक, नगरीय प्रशासन व विकास विभाग