
राज्य ब्यूरो,नईदुनिया,रायपुर। जंगल महकमे में ठेका पद्धति लागू करने की राज्य शासन की मंजूरी के बाद विवाद गहराता जा रहा है। इसके विरोध में मैदानी वन अमले ने कड़ा रुख अपनाते हुए कार्यों के बहिष्कार का नोटिस थमाते हुए चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है।
वन कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री, वन मंत्री और वित्त मंत्री को पत्र सौंपकर दो टूक कहा है कि वन क्षेत्रों में ठेका पद्धति लागू करने से मैदानी वन कर्मचारियों के अधिकार सीमित होंगे, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वन कर्मचारियों ने आंदोलन का दावा करते हुए कहा है कि जंगलों और वन्यजीवों का संरक्षण केवल कागजी प्रक्रिया से संभव नहीं हो सकता है। यदि राज्य शासन को वनों की वास्तविक सुरक्षा और विभागीय व्यवस्था मजबूत करनी है, तो उसे तुरंत ठेका पद्धति पर रोक लगानी चाहिए।
वन अमले ने स्पष्ट किया है कि वे ठेका पद्धति से कराए जाने वाले किसी भी कार्य के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। यदि अधिकारों को सीमित किया गया, तो कामकाज ठप कर कड़ा विरोध जताया जाएगा।
भ्रष्टाचार और तकनीकी कमियों का ठीकरा थोपने का विरोध
कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया है कि जंगलों के भीतर रपटा निर्माण, पुल-पुलिया, वन मार्गों के रखरखाव और जल संरक्षण जैसे वानिकी कार्य ठेके पर कराए जाने पर घटिया निर्माण और तकनीकी कमियों का ठीकरा मैदानी कर्मचारियों पर फोड़ा जाता है।
संघ के अध्यक्ष अजीत दुबे ने चेतावनी दी है कि आंदोलन से व्यवस्था चरमराने पर पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। विभागीय अमले द्वारा कार्य कराए जाने से ही वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और स्थानीय वनवासियों के रोजगार के अवसर भी सुरक्षित रहेंगे।
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