
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। शासकीय कॉलेजों में होने वाली 595 प्राध्यापक भर्ती में हो रही देरी पर हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। भर्ती के लिए दस्तावेज सत्यापन करा चुके अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने लोक सेवा आयोग (पीएससी) से भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी के बारे में पूछा।
पीएएससी की तरफ से जवाब दिया गया कि भर्ती के संबंध में हमारी कुछ सवाल (क्वेरी) थे, जिसे हमने उच्च शिक्षा विभाग को भेज दिया है। वहां से अभी तक जवाब नहीं मिला है। इस वजह से भर्ती प्रक्रिया में देरी हो रही है।
कोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग को पक्ष रखने के लिए बुलाया। उच्च शिक्षा की तरफ से एडवोकेट जनरल (महाधिवक्ता) पक्ष रहा। कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी के लिए फटकार लगाई, साथ ही चार सप्ताह में जवाब देने के निर्देश दिए।
भर्ती प्रक्रिया की सुस्ती का आलम यह है कि कुल 1,533 अभ्यर्थियों का दस्तावेज सत्यापन (डीवी) हुए एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन इसके बाद भी साक्षात्कार (इंटरव्यू) की तिथियां घोषित नहीं की जा सकी हैं। बता दें कि प्राध्यापक भर्ती प्रक्रिया 2021 में शुरू हुई थी, जो अभी तक पूरी नहीं हो पाई है।
पांच साल का लंबा सफर और विवादों का साया
राज्य निर्माण (वर्ष 2000) के बाद यह पहला अवसर है जब प्रोफेसरों के पदों पर इतनी बड़ी संख्या में सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन यह शुरुआत से ही विवादों के घेरे में रही है। वर्ष 2018 में भाजपा की डॉक्टर रमन सिंह सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रोफेसरों की भर्ती के लिए सेवा नियम बनाए गए थे।
बघेल सरकार में भी जारी हुआ था विज्ञापन
सितंबर 2021 में पूर्ववर्ती कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में सीधी भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया। शुरुआती दौर में आयु सीमा को लेकर हुए गंभीर विवाद और कानूनी पेचीदगियों के कारण पूरी प्रक्रिया को बीच में रोकना पड़ा था। अफसरों ने विवाद भी सुलझा दिया।
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अटकी हुई प्रक्रिया को पुनर्जीवित कर गति दी, जिसके तहत अधिकतम आयु सीमा 56 वर्ष और बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए 45 वर्ष निर्धारित की गई। वर्ष 2024 वर्तमान विष्णु देव साय सरकार ने सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कराई और अब अभ्यर्थियों को भर्ती का इंतजार है।
कॉलेजों में 700 प्रोफेसरों और 3000 असिस्टेंट प्रोफेसरों समेत अन्य पद खाली हैं। स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर पठन-पाठन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
700 सहायक प्राध्यापकों का प्रस्ताव भी लौटा
सिर्फ प्रोफेसरों की भर्ती ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा विभाग की लचर कार्यप्रणाली का शिकार अन्य पद भी हो रहे हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने 700 पदों पर सहायक प्राध्यापकों की भर्ती का प्रस्ताव भी आधा-अधूरा भेजा था, जिसे सीजीपीएससी ने फरवरी 2026 में वापस लौटा दिया।